लीगल

‘यह मानवाधिकार का सवाल है…’ पुलिस थानों में CCTV लगाने की तेज़ रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई संतुष्टि

देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने में हुई प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट ने सराहना की. हालांकि कोर्ट ने कुछ राज्यों में इस योजना के फंड की कमी के मामले में चिंता जताई है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है.

मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बैठक के बाद एक स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल की है. एमिकस क्यूरी ने यह भी कहा कि काफी काम पूरा हो चुका है. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि असम के लिए वित्त पोषण योजना दिसंबर में समाप्त होने वाली है. साथ ही कुछ संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें अतिरिक्त धन की आवश्यकता है.

कोर्ट ने कहा कि योजना के तहत प्राप्त धन का उपयोग सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव के लिए नही किया जा सकता है, जिससे राज्य सरकारों को समय के साथ कैमरों को चालू रखने के लिए बहुत कम प्रोत्साहन मिलेगा. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जिसे अब तक धनराशि प्राप्त हुई है और वहां महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं.

CCTV मामले में गृह मंत्रालय सचिव को किया गया था तलब

पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि वे एमिकस आदि के साथ नियमित बैठकें कर सभी मुद्दों का समाधान सुनिश्चित करेंगे.पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय सचिव को तलब किया था. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा था कि अगर आप कहते है कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो दूसरे राज्य उसका अनुसरण क्यों नही कर सकते?

वही जस्टिस संदीप मेहता ने कहा था कि वे बैठक करके केरल मॉडल के अनुसार विकास क्यों नहीं कर सकते? वही इस मामले में पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा था कि इसमें शायद कुछ और राजनीतिक कारण भी है. जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा था कि राज्यों को वैसे भी 40%, 60% देना ही पड़ता है. कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार इसे गंभीरता से ले, उसके बाद कोर्ट इस मामले में आदेश पारित करेगा.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों द्वारा जवाब दाखिल नही करने पर वहां के मुख्य सचिव को तलब करने की बात कही थी. कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थाने का पूछताछ कक्ष वह स्थान है, जहां सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए. कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा था कि राज्य सरकार ने जो हकफनामा दिया है उसके मुताबिक पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नही है. कोर्ट ने कहा था कि सीसीटीवी कैमरे लगाने में लागत तो आएगी, लेकिन यह मानवाधिकार का सवाल है.

ये भी पढ़ें: अनिल अग्रवाल को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, खारिज हुई याचिका; अब ONGC चलाएगी सुवाली तेल ब्लॉक

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

5 साल में गीता तो 8 में याद किए पाणिनि के 4,000 सूत्र… बेंगलुरु के होमस्कूलर बच्चे का अद्भुत कारनामा

GeetaVardhan App: बेंगलुरु के 9 साल के वृषवर्धन शर्मा ने प्राचीन शास्त्रों और आधुनिक तकनीक…

17 minutes ago

28 दिन का चक्कर खत्म, अब 30 दिन की वैलिडिटी! TRAI के नए नियमों की जीत पर बोले राघव चड्ढा

Mobile Recharge New Rules: TRAI ने मोबाइल रिचार्ज के नियमों में बदलाव करते हुए 30…

42 minutes ago

मऊ का ‘भागीरथ’ कार्तिक सहनी: ‘बिट्टू तबाही’ की तर्ज पर…अकेले साफ कर डाली पूरी तमसा नदी

Kartik Sahni Mau: मऊ के 19 वर्षीय कार्तिक सहनी ने 22 दिनों तक लगातार मेहनत…

44 minutes ago

UN में फिर शर्मसार हुआ पाकिस्तान! महिला पत्रकार के तीखे सवाल पर रक्षा मंत्री ने किया ‘भद्दे इशारे’, देखें VIDEO

Pakistan Afghanistan News: संयुक्त राष्ट्र में महिला पत्रकार के तालिबान संबंधी सवाल का जवाब देने…

1 hour ago

दिल्ली में टूटा 18 साल का रिकॉर्ड…यूपी में बारिश बनी काल, जानें आज के मौसम का हाल

Weather Update Today: उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से मकान और दीवारें गिरने के चलते…

2 hours ago