देश

काशी का लोलार्क कुंड, जहां नि:संतान दंपतियों की भरती है गोद, चर्म रोग से मिलती है मुक्ति

“काश्यां हि काशते काशी सर्वप्रकाशिका…” शिवनगरी कहें या धर्म नगरी, काशी अपनी अल्हड़ता और खूबसूरती से लोगों को मोहित करती आई है. ऐसा ही हैरत में डालने वाला और मोहित करने वाला एक चमत्कारी कुंड है… लोलार्क कुंड. इस कुंड की महिमा अपरंपार है, जहां संतान के लिए तरस रही सूनी गोद तो भरती ही है, साथ ही चर्म रोग से मुक्ति भी मिलती है.

घाटों के शहर काशी के भदैनी क्षेत्र स्थित लोलार्क कुंड देखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही इसका पौराणिक महत्व भी है. बाबा झोली भरिहें… इसी विश्वास के साथ हर साल इस कुंड में स्नान करने के लिए लाखों की संख्या में भीड़ जुटती है. संतान की प्राप्ति के लिए लोग लोलार्क छठ मेले में जुटते हैं. गजब का दृश्य बनता है, जहां लोग केवल “जय लोलार्क बाबा, जय लोलार्क बाबा” का नारा लगाते हैं और रात भर कतार में लगे रहते हैं.

मान्यता है कि सूर्य की पहली किरण सबसे पहले कुंड पर ही पड़ती है. कुंड के दक्षिण भाग में लोलार्केश्वर महादेव का मंदिर है.

इस बारे में काशी के ज्योतिषाचार्य, यज्ञाचार्य एवं वैदिक कर्मकांडी पं. रत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर के बारे में कई किंवदंतियां प्रचलित हैं. यहां गढ़वाल नरेश ने अपनी सातों रानियों के साथ स्नान किया, जिसके बाद उन्हें संतान की प्राप्ति हुई थी. उन्होंने कुंड का निर्माण 9वीं शताब्दी में करवाया था. वहीं, अहिल्याबाई होलकर ने कुंड का पुनरुद्धार कराया था.

काशी के निवासी प्रभुनाथ त्रिपाठी ने बताया कि चमत्कारी मंदिर और कुंड में लोगों की विशेष आस्था है. यहां पर साल भर लोग दर्शन-पूजन और अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. हालांकि, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को देश भर के कोने-कोने से लोग स्नान के लिए आते हैं. लोलार्क कुंड में तीज से ही नहान शुरू हो जाता है और षष्ठी तक चलता है.

उन्होंने आगे बताया, “कुंड के बारे में कहा जाता है कि यहां पर महाभारत युद्ध के दौरान कर्ण का कुंडल गिरा था, जिस वजह से यहां पर गड्ढा हो गया. यहां के जल को अमृत माना जाता है.

एक किंवदंती यह भी है कि एक राजा जिन्हें चर्म रोग था और वैद्य से इलाज करवाने के बावजूद उनका रोग ठीक नहीं हो रहा था, इस रास्ते से गुजरने के दौरान उन्हें प्यास लगी और उन्होंने भिश्ती (पानी ढोने वाले) से पानी लाने को कहा. भिश्ती को आस-पास कोई जगह नहीं दिखी सो गड्ढे से पानी भर लाया और राजा को पिला दिया. पानी पीने के बाद राजा का चर्म रोग ठीक हो गया.

मान्यता है कि संतान प्राप्ति की कामना के साथ सच्चे मन और श्रद्धा के साथ कुंड में दंपति स्नान करते हैं और कुंड में संकल्प के साथ सीताफल और अन्य सामान छोड़ते हैं. जब उनकी कामना पूरी हो जाती है तो वे अपने बच्चे का यहां पर मुंडन संस्कार करवाते हैं और हलवा-पूरी बाबा को प्रसाद स्वरूप चढ़ाते हैं. कुंड में उतरने के लिए उत्तर, दक्षिण और पश्चिम तीनों दिशाओं में लंबी-लंबी सीढ़ियां हैं और पूर्व दिशा की ओर दीवार है.

ये भी पढ़ें: साल के सबसे खतरनाक अग्नि पंचक में भूलकर भी न करें ये काम, वरना हो सकते हैं भारी नुकसान– जानिए कब से कब तक रहेगा?

-भारत एक्सप्रेस

आईएएनएस

Recent Posts

संभल हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले के आरोपी मुल्ला अफरोज की NSA के तहत हिरासत…

5 minutes ago

RBI रेपो रेट से लेकर फ्रिज-एसी और ITR तक…जानिए 1 अक्टूबर से क्या-क्या बदल जाएगा?

October 2026 Rule Changes: 1 अक्टूबर 2026 से बैंकिंग, ATM निकासी, LPG KYC, FD, स्मॉल…

19 minutes ago

बिस्तर से निकला नोटों का ढेर, अलमारी में कुबेर का खजाना! बिहार में ADM-सब रजिस्ट्रार कपल के घर रेड

बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी ब्यूरो ने पटना के एडीएम…

26 minutes ago

किराए के मकान में चल रहा था नकली नोटो का खेल! जम्मू से बरामद हुई फेक करेंसी, तीन गिरफ्तार

Jammu Fake Currency Case: जम्मू की सैनिक कॉलोनी पुलिस ने नकली करेंसी तैयार करने के…

30 minutes ago

जीवन को बदल देने वाले महामंत्र: गीता के 10 सूत्र जो रोजमर्रा की जिंदगी आसान बना सकते हैं

Life-Changing Maha Mantras: साक्षी श्री की किताब ‘जीवन को बदल देने वाले महामंत्र’ गीता के…

34 minutes ago

TRAI Data August 2026: जियो ने जोड़े सबसे ज्यादा मोबाइल यूजर्स, एयरटेल भी आगे; MTNL को हुआ नुकसान

TRAI Data August 2026: TRAI के अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में मोबाइल…

46 minutes ago