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Kashi

“दण्डपाणि च भैरवम्” यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी और प्रो. (डॉ.) विजय नाथ मिश्र द्वारा संकलित एक अद्भुत कृति है, जो काशी (वाराणसी) की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संपदा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है.

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की प्राचीन परम्पराएं आज भी पूर्ण रूप से जीवंत हैं. वाराणसी (काशी) के बाल-वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने इसे सिद्ध कर दिखाया है.

देव दीपावली के कुछ ही दिन बाद वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। नवंबर के महीने में इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। घाटों की ऊपरी सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है और नाविकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। राजेंद्र प्रसाद, दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर पानी का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है। स्थानीय लोग इसे असामान्य मौसम परिवर्तन बता रहे हैं। प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है। अगर पानी इसी रफ्तार से बढ़ा तो अगले 24 घंटे में कई घाटों का आपसी संपर्क टूट सकता है।

Hindu Samvad Mahotsav: मुंबई की भाजपा यूनिट ने वाराणसी के विश्वनाथ घाट से देव दीपावली और गंगा आरती का सीधा प्रसारण 8 स्थानों पर किया. भक्तों ने सनातन परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लिया.

वाराणसी के लोहता क्षेत्र में स्थित शीतला चिल्ड्रन स्कूल में बच्चों ने अनोखे अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. स्कूल परिसर में मानव श्रृंखला बनाकर लगाए "हैप्पी बर्थडे टू यू, मोदी जी" के नारे.

Lolark Kund Varanasi: वाराणसी के लोलार्क कुंड में लोलार्क षष्ठी पर लाखों दंपत्तियों ने पुत्र प्राप्ति के लिए स्नान किया. 36 घंटे के महापर्व का भव्य आयोजन किया गया. पुलिस का अनुमान है कि इस बार 6 लाख श्रद्धालु पहुंचे.

Kalashtami 2025: काशी के कोतवाल (रक्षक) के रूप में काल भैरव की पूजा होती है, जिन्हें भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है. लेकिन, आखिर क्यों उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है?

काशी के लोलार्क कुंड में स्नान से संतान की प्राप्ति और चर्म रोग से मुक्ति की मान्यता है. भाद्रपद शुक्ल षष्ठी तिथि पर यहां लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं.

वाराणसी के मदनपुरा की गलियों में, मकान नंबर D 31/65, गोल चबूतरा के नजदीक सैकड़ों बरस पुराना शिव मंदिर मिला है. तस्‍वीरें सामने आने के बाद से वहां हिंदु अनुयायियों का तांता लग गया है.

भारत एक्सप्रेस के कॉनक्लेव काशी का कायाकल्प में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि पहले यूपी की पहचान खराब सड़कों से होती थी. 2017 से पहले बिजली एक सप्ताह रात और एक सप्ताह दिन में आती थी. भाजपा सरकार में स्थिति बदल गई है.