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मनरेगा का नाम बदला: मोदी सरकार ला रही ‘विकसित भारत रोजगार गारंटी’ बिल, कांग्रेस बोली- गांधीजी का नाम क्यों हटाया

MGNREGA Renaming: मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी (MGNREGA) को खत्म करने की तैयारी में है. इसके जगह पर एक नया कानून लाया जा रहा है. इस नए बिल का नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025’ है. इसे छोटा करके वीबी-जी राम जी भी कहा जा रहा है. कुछ लोग इसे ‘विकसित भारत जी राम जी’ कहकर मजाक उड़ा रहे हैं. सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण इलाकों में रोजगार को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है.

इस बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा. आज यानी 15 दिसंबर 2025 को संसद के शीतकालीन सत्र में इसे रखा जा सकता है. सरकार ने लोकसभा सांसदों को इस बिल की कॉपी बांटी है. बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है. इसमें 15 से 19 दिसंबर तक सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा दो और बड़े बिल पेश किए जाएंगे- उच्च शिक्षा और एटॉमिक एनर्जी से जुड़े.

MGNREGA से क्या बदलाव आए?

मनरेगा 2005 में शुरू हुआ था. इसमें ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है. मजदूरी राज्य के हिसाब से अलग-अलग होती है. अब नए बिल में रोजगार के दिनों को बढ़ाकर 125 कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि पिछले 20 सालों में मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने में बड़ी भूमिका निभाई है. लेकिन अब ग्रामीण इलाकों में बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव आए हैं. जैसे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार और सरकार की मुख्य योजनाओं का अच्छा क्रियान्वयन. इसलिए नया और मजबूत ढांचा बनाने की जरूरत है.

‘विकसित भारत 2047’से जुड़ा नया कानून

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा को और मजबूत बनाने की जरूरत है. नया कानून ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के साथ जुड़ा है. इसमें हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को अकुशल काम के लिए 125 दिनों की मजदूरी वाली नौकरी की गारंटी मिलेगी.
बिल पास होने के बाद मनरेगा पूरी तरह खत्म हो जाएगा. सारे प्रावधान नए कानून के तहत आएंगे.

विपक्षी नेता कर रहे बदलाव की तीखी आलोचना

MGNREGA के बदलाव पर विपक्षी नेता सरकार को घेर रहे हैं. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि नाम बदलने से क्या फायदा है. महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा है. प्रियंका ने कहा कि नाम बदलने से कार्यालयों, स्टेशनरी और अन्य चीजों में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे. इससे सरकार का बहुत पैसा खर्च होगा. उन्होंने सवाल किया कि ऐसा करने का क्या मतलब है. महात्मा गांधी को सिर्फ भारत में नहीं, पूरी दुनिया में महान नेता माना जाता है. उनका नाम हटाने के पीछे क्या इरादा है. प्रियंका ने कहा कि संसद में असली मुद्दों पर बहस होनी चाहिए. जनता के मुद्दों पर नहीं, बल्कि दूसरे विषयों पर समय बर्बाद हो रहा है.

ये ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी बूटी: जयराम

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने MGNREGA के बदलाव पर मोदी सरकार को ‘री-ब्रांडिंग का मास्टर’ बताया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार यूपीए की योजनाओं का नाम बदलकर अपना बना लेती है. कांग्रेस सांसद सुप्रिया श्रीनेत ने एक वीडियो शेयर किया. इसमें कहा गया कि मोदी जी मनरेगा को कांग्रेस की विफलता बताते थे. लेकिन यह योजना ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई.

यूपीए की 32 योजनाओं के नाम बदले: कांग्रेस

कांग्रेस का दावा है कि मोदी सरकार ने यूपीए की 32 योजनाओं के नाम बदल दिए हैं. कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि मनरेगा में 100 दिन की नौकरी की गारंटी है. लेकिन हरियाणा में 8 लाख से ज्यादा लोग रजिस्टर्ड हैं. सिर्फ 2100 को ही 100 दिन का काम मिला. पिछले 5 सालों में किसी को मुआवजा नहीं मिला. पहले योजना को ठीक से चलाओ, फिर नाम बदलो. गांधी जी का नाम हटाना ठीक नहीं है. कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि अब ये राष्ट्रपिता कौन है, वो भी बदल देंगे. यह अजीब स्थिति है.

शीतकालीन सत्र में गर्माई राजनीतिक बहस

यह विवाद संसद के शीतकालीन सत्र में गर्माया हुआ है. सरकार का कहना है कि बदलाव जरूरी है. लेकिन विपक्ष इसे गांधी जी का अपमान बता रहा है. तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी सरकार की आलोचना की. कांग्रेसियों का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए महत्वपूर्ण योजना है. इसमें करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है.

इसका नया कानून ज्यादा प्रभावी होगा- सरकार

हालांकि, योजना का नाम बदलने से क्या असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है. सरकार का कहना है कि नया कानून ज्यादा प्रभावी होगा. लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह सिर्फ नाम बदलकर क्रेडिट लेने की कोशिश है. आने वाले दिनों में संसद में इस पर बहस हो सकती है. जनता को देखना है कि नया कानून कितना फायदेमंद साबित होता है.

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Vijay Ram

'भारत एक्सप्रेस' में चीफ सब एडिटर। न्‍यूज वेबसाइट पर एवरग्रीन स्‍टोरीज, क्रिएटिव/स्‍पेशल प्रजेंटेशन, हाइलाइट्स के अगुआ। संस्‍था के शुरुआती दौर से दिन-रात हर मौके पर दम-दिमाग झोंककर स्वयं को तपाया। अब तक 8,000 से ज्‍यादा पोस्ट्स पब्लिश कर चुके, 1K+ बाइलाइन हुईं। 'भारत एक्सप्रेस' के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय जी के प्रोग्राम्स (कॉन्क्लेव), और आर्टिकल्‍स को Bharatexpress.com पर प्रमुखता से कवर करते हैं। जर्नलिज्‍म में इनके 10+ वर्ष बीते। यहां से पहले एबीपी इंटरनेशनल, वनइंडिया हिंदी, राजस्‍थान पत्रिका और भास्कर ग्रुप में सेवा दे चुके। देश-विदेश, सैन्य-रणनीति, स्पेस साइंस, ऑफबीट, धर्म-अध्यात्म की खबरों में रुचि।

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