Karnataka Muslim Resrvation: कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को काफी गहमागहमी के बीच सदन में जमकर हंगामा हुआ. सदन में विपक्षी दल बीजेपी के कड़े विरोध के बीच सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए चार फीसदी आरक्षण देने वाला विधेयक शुक्रवार (21 मार्च) को पारित हो गया. बिल के विरोध में बीजेपी विधायक विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर के आसन के समीप आ गए और उन पर कागज फेंकने लगे. इसके बाद खादर के निर्देश पर मार्शल ने उन विधायकों को बाहर निकाल दिया.
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कर्नाटक में सरकारी ठेके में अल्पसंख्यकों को चार फीसदी आरक्षण दिए जाने पर कहा कि कर्नाटक में पिछले 25 सालों से आरक्षण व्यवस्था लागू है, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी, बैकवर्ड क्लास, मोस्ट बैकवर्ड क्लास, और अल्पसंख्यक समुदायों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है. यह कोई नया आरक्षण नहीं है.
सांसद नसीर हुसैन ने इस व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम शोषण और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर उठाया गया है, ताकि समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिल सके. उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा अब आरक्षण को और विस्तृत करने का स्वागत किया, जिसमें सरकारी ठेके में दो करोड़ रुपये तक के ठेके पर आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही बैकवर्ड क्लास और अल्पसंख्यकों को भी इस व्यवस्था का लाभ दिया जा रहा है, जिससे वे देश के विकास में सक्रिय रूप से शामिल हो सकें.
इसके अलावा सांसद हुसैन ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा विधानसभा में 18 विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित किए जाने पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पूछा कि भाजपा ने कितने सांसदों को निलंबित किया था, और यह याद दिलाया कि किसानों के काले कानून के विरोध में 12 सांसदों को निलंबित किया गया था, वहीं सुरक्षा कारणों से 56 सांसदों को निलंबित किया गया था. उन्होंने भाजपा से यह सवाल पूछा कि इस पर उनका क्या जवाब है?
इससे पहले बीते शुक्रवार को मंत्रिमंडल ने कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत दो करोड़ रुपये तक के सार्वजनिक कामों और एक करोड़ रुपये तक के माल/सेवा खरीद अनुबंध में मुसलमानों को 4 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सात मार्च को पेश किए गए अपने 2025-26 के बजट में इसकी घोषणा की थी.
फिलहाल कर्नाटक में सिविल कार्य ठेकों में एससी/एसटी के 24 फीसदी जबकि ओबीसी से संबंधित श्रेणी-1 के लिए चार फीसदी और श्रेणी-2ए के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण है. चार प्रतिशत आरक्षण के साथ ओबीसी की श्रेणी-2बी के तहत मुसलमानों को जोड़ने की मांग की गई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने कहा है कि वह विधेयक को कोर्ट में चुनौती देगी.
-भारत एक्सप्रेस
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