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मुजफ्फरपुर में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, दियारा इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराया

रिपोर्ट- मनोज कुमार


मुजफ्फरपुर: नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश और वहां बने बाढ़ जैसे हालात का असर अब उत्तर बिहार की नदियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. मुजफ्फरपुर से गुजरने वाली गंडक नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नदी का पानी जिस तेजी से ऊपर जा रहा है, उससे जिले के निचले और दियारा इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है.

स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में सतर्कता बढ़ा दी है. मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग (CWC) से मिले पूर्वानुमानों के आधार पर अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

गंडक के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर जिले के साहेबगंज, पारू और सरैया प्रखंड के निचले इलाकों में पड़ने की आशंका है. खासकर दियारा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

इन इलाकों में बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं. अगर नदी का पानी और बढ़ता है, तो खेतों में खड़ी सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब सकती है. वहीं, रिहायशी इलाकों तक पानी पहुंचने की स्थिति में ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ सकता है. ऐसे में प्रशासन के सामने राहत शिविर, नाव और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती होगी.

खतरे के निशान के करीब पहुंची गंडक

जल संसाधन विभाग और मुजफ्फरपुर जिला आपातकालीन संचालन केंद्र की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में कई प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार निगरानी में है.

  • रेवा घाट पर गंडक नदी: खतरे का निशान 54.41 मीटर है. जलस्तर बढ़कर 53.71 मीटर पहुंच गया है और इसमें तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है.
  • कटौंझा में बागमती नदी: खतरे का निशान 55.00 मीटर है, जबकि मौजूदा जलस्तर 53.65 मीटर है. यहां भी पानी बढ़ रहा है.
  • सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक: खतरे का निशान 52.53 मीटर है और वर्तमान जलस्तर 47.01 मीटर दर्ज किया गया है. फिलहाल यहां जलस्तर स्थिर बताया गया है.
  • खास चिंता रेवा घाट पर गंडक के जलस्तर को लेकर है, जहां नदी खतरे के निशान से महज कुछ दूरी पर है.

24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश

बढ़ते खतरे को देखते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव ने प्रशासनिक अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है. जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को भी लगातार स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है.

प्रशासन ने गंडक और बूढ़ी गंडक समेत संवेदनशील नदियों के तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है. अधिकारियों और संबंधित विभागों की टीमें लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं, ताकि कहीं तटबंध कमजोर नजर आए तो समय रहते उसकी मरम्मत कराई जा सके.

नाव और राहत शिविर की तैयारी

प्रशासन की कोशिश है कि अगर नदी का पानी खतरे के निशान को पार करता है और गांवों की ओर बढ़ता है, तो राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में जरा भी देरी न हो. इसके लिए प्रभावित प्रखंडों के अंचल अधिकारियों (CO) और प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) को निचले इलाकों की स्थिति पर खास नजर रखने को कहा गया है.

जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था करने के साथ-साथ संभावित राहत शिविरों के लिए जगह चिन्हित करने का निर्देश भी दिया गया हैं.

यह भी पढ़ें: गंडक-गंगा उफान पर, मंडराया भारी बारिश और बाढ़ का खतरा; जानिए यूपी के कौन से 16 शहर रेड जोन में?

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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