Narottam Mishra Warning: दतिया/मनोज: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस समय प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है. बीजेपी आलाकमान के समझाने-बुझाने के बाद कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा आखिरकार संगठन के फैसले के आगे मान गए हैं. वे दतिया उपचुनाव में आशुतोष तिवारी के लिए मंचों से वोट भी मांग रहे हैं और उनके समर्थन में चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं. लेकिन, चुनावी मंचों पर साथ दिखने के बावजूद दतिया की सड़कों पर जो खौफनाक मंजर पिछले दिनों दिखा, उसने नरोत्तम मिश्रा के भीतर सुलग रहे ज्वालामुखी को हवा दे दी है.
भले ही नरोत्तम मिश्रा पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन जब बात उनके वफादार समर्थकों पर आई, तो वे एक बार फिर अपने पुराने आक्रामक अंदाज में सड़कों पर उतर आए. दतिया के मंच से उन्होंने जिले के कलेक्टर और एसपी को खुलेआम चेतावनी दी है. नरोत्तम मिश्रा भले ही शांत दिख रहे हों, लेकिन वे अपने समर्थकों पर हुए एक्शन को कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं.
दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था. कार्यकर्ताओं ने पार्टी के फैसले के खिलाफ नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया और उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन को कुचलने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और नेशनल हाईवे का जाम खुलवाया. लेकिन मामला तब बिगड़ गया जब पुलिस बल नरोत्तम मिश्रा के निजी कार्यालय तक पहुंच गया और वहां कथित तौर पर आंसू गैस के गोले दाग दिए गए.
पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए नरोत्तम मिश्रा के सैकड़ों वफादार कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज (FIR) कर दिए. अपने कार्यकर्ताओं को इस तरह पुलिसिया कार्रवाई में घिरता देख नरोत्तम मिश्रा खुद को रोक नहीं पाए और मंच से सीधे दतिया के आला अफसरों को निशाने पर ले लिया.
बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के प्रचार मंच पर खड़े होकर नरोत्तम मिश्रा ने दतिया के एसपी और कलेक्टर को ललकारते हुए जो शब्द कहे, उसने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है. उन्होंने गरजते हुए कहा कि-
कप्तान कान खोलकर सुन लें, मैं भूलने वाला प्राणी नहीं हूं, मैं हर एक बात याद रखता हूं. मैं जितनी शिद्दत से दोस्ती निभाता हूं, उतनी ही कड़ाई से दुश्मनी भी याद रखता हूं. आपको हाईवे का चक्का जाम खुलवाना था, तो आप खुलवा लेते, उसमें कोई आपत्ति नहीं थी. लेकिन मेरे कार्यालय के भीतर घुसकर आंसू गैस के गोले क्यों दागे गए? हमारे निर्दोष कार्यकर्ताओं पर सैकड़ों झूठे अपराध क्यों दर्ज किए गए? वक्त बदलने में देर नहीं लगती, और मैं एक-एक लाठी और आंसू गैस के गोले का हिसाब याद रखूंगा.
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नरोत्तम मिश्रा का यह बयान साफ करता है कि वे मध्य प्रदेश की राजनीति के वो ‘टाइगर’ हैं जिन्हें बैकफुट पर धकेलना किसी के बस की बात नहीं है. उन्होंने पार्टी के कहने पर चुनाव प्रचार में उतरकर अपनी सांगठनिक वफादारी तो साबित कर दी है, लेकिन दतिया के एसपी और कलेक्टर को सरेआम मंच से धमकी देकर यह संदेश भी दे दिया है कि दतिया का असली ‘बॉस’ आज भी वही हैं. कार्यकर्ताओं पर दर्ज हुई एफआईआर ने उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचाई है, जिसका हिसाब वे आने वाले समय में चुकता करने का इरादा रखते हैं.
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