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Ashwini Choubey On Nitish Kumar: बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला कर भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है. इस फैसले के बाद गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या नीतीश कुमार देश के अगले उप-प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं? हालांकि आधिकारिक तौर पर केवल उनके राज्यसभा नामांकन की बात हुई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में अश्विनी चौबे के उस ‘भविष्यवाणी’ वाले बयान को मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है.
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अश्विनी चौबे ने पहले ही यह इच्छा जाहिर की थी. अप्रैल 2025 में उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का कद अब मुख्यमंत्री पद से बड़ा हो चुका है. उन्होंने तर्क दिया था कि नीतीश कुमार ने एनडीए के संयोजक के रूप में लंबा समय बिताया है और उनका अनुभव देश के काम आना चाहिए.
चौबे के अनुसार, बाबू जगजीवन राम के बाद यदि बिहार से किसी को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है, तो यह राज्य के लिए अत्यंत लाभकारी और सम्मानजनक होगा. उन्होंने माना था कि यह जोड़ी देश को नई दिशा दे सकती है.
तकनीकी रूप से देखा जाए तो भारतीय संविधान में ‘उप-प्रधानमंत्री’ जैसा कोई संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन राजनीतिक संतुलन साधने के लिए पहले भी कई बार इस पद का उपयोग किया गया है. सरदार पटेल से लेकर लालकृष्ण आडवाणी तक, भारत में अब तक 7 उप-प्रधानमंत्री रहे हैं. वर्तमान में केंद्र में ऐसा कोई पद नहीं है, लेकिन 2026 की बदलती परिस्थितियों और बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के बदले नीतीश कुमार को केंद्र में ‘नंबर 2’ की भूमिका दी जा सकती है.
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इसे बीजेपी की एक ‘सोची-समझी चाल’ बता रहा है ताकि नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय सत्ता से दूर कर राज्य में बीजेपी का पूर्ण वर्चस्व स्थापित किया जा सके. नेताओं का कहना है कि यह नीतीश कुमार की अपनी इच्छा है. उन्होंने खुद कहा है कि उनकी पुरानी इच्छा थी कि वे संसद के दोनों सदनों का हिस्सा बनें.
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना महज एक ‘रिटायरमेंट’ नहीं, बल्कि केंद्र में एक बड़ी जिम्मेदारी की आहट हो सकता है. यदि अश्विनी चौबे का दावा सच साबित होता है, तो नीतीश कुमार केंद्र में एक मजबूत कूटनीतिक स्तंभ बनकर उभरेंगे. फिलहाल, सबकी नजरें अमित शाह की पटना यात्रा और उसके बाद दिल्ली में होने वाली कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट पर टिकी हैं.
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