Operation Sindoor Hero Shravan Singh: कहते हैं जंग सिर्फ बंदूकों से नहीं, हौसलों से लड़ी जाती है. पंजाब के फिरोजपुर के 10 साल के श्रवण सिंह ने इसे सच कर दिखाया है. जब सीमा पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत तनाव चरम पर था और तोपें गरज रही थीं, तब यह नन्हा जांबाज अपनी जान की परवाह किए बिना भारतीय सैनिकों के लिए ‘लाइफलाइन’ बना हुआ था. उसकी इसी निस्वार्थ सेवा और अदम्य साहस का सम्मान करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से नवाजा है.
फिरोजपुर के सीमावर्ती गांव ‘चक तरन वाली’ का है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, तो गांव में सेना की तैनाती बढ़ गई. तपती गर्मी में जब जवान मोर्चे पर डटे थे, तब 10 साल का श्रवण उनके लिए देवदूत बन गया.
श्रवण की हिम्मत इसलिए और भी बड़ी हो जाती है क्योंकि वह खुद एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है. महज साढ़े चार साल की उम्र में उसका हर्निया का ऑपरेशन हुआ था और 6 साल की उम्र से वह टाइप-1 डायबिटीज (शुगर) का मरीज है. उसे स्वस्थ रहने के लिए रोजाना इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है. बीमारी और शारीरिक कमजोरी को दरकिनार कर उसने जिस तरह देशसेवा की, उसने सेना के बड़े-बड़े अधिकारियों का दिल जीत लिया.
श्रवण के जज्बे को सलाम करते हुए भारतीय सेना ने भी बड़ा एलान किया है. वेस्टर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने घोषणा की है कि श्रवण सिंह की पढ़ाई का पूरा खर्च अब भारतीय सेना उठाएगी. सेना ने उसे एक ‘मौन नायक’ बताया है. श्रवण का सपना भी बड़ा होकर सेना की वर्दी पहनना है.
26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रवण को सम्मानित किया. पुरस्कार पाकर भावुक श्रवण ने कहा, “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे राष्ट्रपति जी से सम्मान मिलेगा. मैंने तो बस अपना फर्ज निभाया था.
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