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बांग्लादेश में ‘पाप’ है संगीत? ‘भीगी-भीगी’ वाले जेम्स पर ईंटों की बारिश, जंग का मैदान बना जश्न; तसलीमा का युनुस को तमाचा

Bangladesh News: फैंस गानों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन भीड़ ‘पत्थर’ लेकर आई थी. बांग्लादेश के सबसे बड़े रॉकस्टार सिंगर जेम्स (नगर बाउल) को स्टेज से भागना पड़ा, क्योंकि वहां अब संगीत ‘गुनाह’ बन गया है.

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Bangladesh News: जिस बांग्लादेश में लोग दावा करते हैं कि वहां ‘नया सवेरा’ (यूनुस सरकार) आ गया है, वहां की असलियत एक बार फिर ईंट और पत्थरों के रूप में सामने आई है. मशहूर रॉकस्टार और बॉलीवुड फिल्म ‘गैंगस्टर’ के ‘भीगी-भीगी’ गाने से दिलों पर राज करने वाले सिंगर जेम्स (नगर बाउल) को फरीदपुर में अपनी कला का प्रदर्शन करने के बजाय भीड़ के पथराव का सामना करना पड़ा. शायद बांग्लादेश की ‘संस्कारी’ भीड़ को लगा कि गिटार की धुन से ज्यादा मधुर आवाज ईंटों के टकराने की है, इसलिए उन्होंने कॉन्सर्ट को जंग का मैदान बना दिया.

185 साल पुराने स्कूल में ‘नफरत’ का पाठ

मौका था फरीदपुर जिला स्कूल की 185वीं वर्षगांठ का. जश्न मनाया जाना था, सुर सजने थे, लेकिन वहां मौजूद कट्टरपंथी तत्वों ने इसे अपनी ताकत दिखाने का मौका बना लिया. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार रात जैसे ही जेम्स मंच पर आने वाले थे, एक ‘खास’ गुट ने जबरन घुसने की कोशिश की. जब सुरक्षाकर्मियों ने रोका, तो इन ‘शांतिदूतों’ ने स्टेज और छात्रों पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए.

  • नतीजा यह हुआ कि कम से कम 20 लोग घायल हो गए, जिनमें ज्यादातर स्कूल के छात्र हैं.
  • जिस स्कूल ने 1840 से इतिहास देखा था, उसने 2025 में अपनी ही धरती पर संस्कृति का जनाजा निकलते देखा.
  • प्रशासन को मजबूरन शो कैंसिल करना पड़ा और जेम्स को भारी सुरक्षा के बीच वहां से सुरक्षित निकाला गया.

संगीत से नफरत या जिहादी एजेंडा? (Taslima Nasreen On Bangladesh)

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने इस घटना पर तीखा तंज कसा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ लिखा कि यह महज एक हंगामा नहीं, बल्कि जिहादी मानसिकता है. तसलीमा ने बताया कि कैसे धीरे-धीरे बांग्लादेश से कला और संगीत को खदेड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा-

‘सांस्कृतिक केंद्र ‘छायानाट’ को जलाकर राख कर दिया गया और अब जिहादियों ने जेम्स को गाने से रोक दिया.’

तसलीमा ने यह भी खुलासा किया कि मैहर घराने के उस्ताद सिराज अली खान और उस्ताद राशिद खान के बेटे अरमान खान ने ढाका आने से साफ इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि वे ऐसे देश में कदम नहीं रखेंगे जहां संगीत से नफरत करने वाले लोग भरे पड़े हों.

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क्या यही है ‘नया बांग्लादेश’? (New Bangladesh)

भीड़ का यह हमला बताता है कि बांग्लादेश में अब कलाकारों के लिए कोई जगह नहीं बची है. जिस देश में उस्ताद अलाउद्दीन खान के वंशज आने से डर रहे हों और जहां अपने ही देश के सबसे बड़े रॉकस्टार पर पत्थर फेंके जा रहे हों, वहां ‘लोकतंत्र’ और ‘आजादी’ के दावे खोखले नजर आते हैं. फरीदपुर की घटना ने साबित कर दिया है कि वहां भीड़ तंत्र हावी है, जो तय करेगी कि क्या सुना जाएगा और क्या नहीं.



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