देश

Paid Period Leave: अब अदालतों में नहीं, नीति-निर्माताओं के द्वार पर है यह लड़ाई

Paid Period Leave: भारत में ‘पेड पीरियड लीव’ (Paid Period Leave) को लेकर छिड़ी बहस अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कानून बनाने की गेंद केंद्र और राज्य सरकारों के पाले में डाल दी है, वहीं दूसरी ओर सड़कों और नीतिगत गलियारों में इस आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है. इस पूरे अभियान का चेहरा बनकर उभरी हैं रंजीता प्रियदर्शिनी, जो पिछले तीन वर्षों से बिना थके महिलाओं के इस अधिकार के लिए संघर्ष कर रही हैं.

व्यक्तिगत अपमान से ‘राष्ट्रीय आंदोलन’ तक का सफर

इस मुहिम की शुरुआत रंजीता के एक कड़वे व्यक्तिगत अनुभव से हुई थी. साल 2022 में, जब रंजीता ने मासिक धर्म की गंभीर तकलीफ के दौरान कार्यस्थल पर छुट्टी मांगी, तो उन्हें सहयोग के बजाय अपमान और इस्तीफे के दबाव का सामना करना पड़ा. उन्होंने हार मानने के बजाय नौकरी छोड़ दी और ‘पेड पीरियड लीव (PPL) कैंपेन’ का आगाज किया. जो लड़ाई एक दफ्तर से शुरू हुई थी, आज वह 23 राज्यों और 6 देशों तक फैल चुकी है.

वैश्विक मंच पर गूंजी भारत की आवाज

रंजीता की यह कोशिश केवल ज्ञापन देने तक सीमित नहीं रही. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) के सम्मेलनों में नैरोबी से लेकर न्यूयॉर्क तक मासिक धर्म अवकाश को ‘मानव अधिकार’ और ‘वर्कप्लेस डिग्निटी’ के रूप में पेश किया. थाईलैंड, मलेशिया और ब्रिटेन जैसे देशों में भी उन्होंने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय संवाद स्थापित किया, जिससे यह भारत के साथ-साथ एक वैश्विक मुद्दा बन गया.

राज्यों ने बढ़ाया कदम

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही इसे नीतिगत विषय बताकर हस्तक्षेप से मना कर दिया हो, लेकिन रंजीता के निरंतर संवाद का असर सरकारी नीतियों में दिखने लगा है. ओडिशा ने 2024 में कामकाजी महिलाओं के लिए इस अवकाश को लागू किया. 2025 में कर्नाटक 12 दिन की सालाना पेड पीरियड लीव का ऐतिहासिक प्रावधान शुरू किया. प्राइवेट सेक्‍टर की बात करें तो वर्तमान में देश के 64 बड़े संस्थान और 27 अंतरराष्ट्रीय संगठन इस नीति को अपना चुके हैं.

रंजीता कहती हैं, उन्‍हें अदालत के रुख से फर्क नहीं पड़ता, बल्कि वो तो पहले से ही ये मानकर चल रही हैं कि मामला, सरकारों के हाथ में है. अब रंजीता का पूरा ध्यान सीधे सरकारों के साथ मिलकर श्रम कानूनों (Labour Laws) में संशोधन करवाने पर है. उनका मानना है कि जब तक कार्यस्थल पर महिलाओं को शारीरिक कष्ट के दौरान सम्मानजनक अवकाश और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक कार्यस्थल की समानता अधूरी है.

ये भी पढ़ें: मोदी सरकार की इस योजना से कृष्णा आशीष बने स्वरोजगार की मिसाल, दूसरों को भी दे रहे रोजगार

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

संगीत और क्रिकेट का संगम; अनिरुद्ध संग 7 फेरे लेंगी SRH की मालकिन, यहां होगा ग्रैंड रिस्पेशन

Kavya Maran & Anirudh Ravichander Wedding: सनराइजर्स हैदराबाद की मालकिन काव्या मारन और म्यूजिक कंपोजर…

2 minutes ago

मंदिर से पोती के साथ लौट रही महिला को झपटमार ने बनाया निशाना, 70 हजार की सोने की बालियां छीनीं

Panjab Crime News: बलटाना क्षेत्र में अपनी पोती के साथ मंदिर से घर लौट रही…

12 minutes ago

अरे दादा! ट्रेन के AC कोच में ‘पान लीला’, शौकीनों का भौकाल से चकराया इंटरनेट

Train Paan Shop Viral Video: क्या आपने कभी चलती ट्रेन के AC डिब्बे में सजती…

13 minutes ago

प्रतापगढ़ में शराब बनी कातिल, शराबी पति को पत्नी ने टोका तो ईंट से कूचकर कर दी हत्या

Pratapgarh Wife Murder: प्रतापगढ़ जिले के फतनपुर थाना क्षेत्र के एक स्थानीय बाजार में पति…

22 minutes ago

तालाब में गड़ी है ‘चंद्रहास तलवार’, दुकानों पर लिखा है ‘जय रावण बाबा’… जानिए MP के इस गांव का हैरान करने वाला सच

Dussehra Unique Tradition: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के 'रावण' गांव में दशहरे पर पुतला…

33 minutes ago

प्रियागोल्ड बिस्कुट में मिला चोकर, ऑर्गेनिक किशमिश में मिले कीटनाशक, FSSAI ने 3 कंपनियों पर की कार्रवाई

FSSAI Action On Priyagold Biscuits: खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा…

34 minutes ago