Pakistan On Amit Shah Ladakh Visit: जम्मू/रवि शर्मा: भारत जब भी अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की इबारत लिखता है, पाकिस्तान की नींद उड़ जाती है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस समय लद्दाख के अहम दौरे पर हैं. इस दौरान लद्दाख में नए जिलों के गठन और वहां चल रही विकास परियोजनाओं को देखकर पाकिस्तान बुरी तरह तिलमिला गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपनी हताशा जाहिर करते हुए इस कदम का विरोध किया है. पाकिस्तान की इस बेजा बयानबाजी पर केवल सत्तारूढ़ बीजेपी ने ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों (NC और PDP) ने भी एक सुर में उसे करारा जवाब दिया है.
लद्दाख में नए जिलों के गठन पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी (Tahir Hussain Andrabi) ने एक बयान जारी कर आपत्ति जताई. पाकिस्तान ने अपनी पुरानी आदत के मुताबिक इसे “राजनीतिक इंजीनियरिंग” करार दिया. पाक विदेश मंत्रालय ने कहा कि, “हम इस क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा स्वीकार नहीं करते हैं. लद्दाख भारतीय संघ का हिस्सा कभी नहीं रहा. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र में भारत की एकतरफा कार्रवाई है जो संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्तावों के खिलाफ है.”
पाकिस्तान के इस जहर बुझे बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता विक्रम रंधावा ने करारा प्रहार किया. उन्होंने पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाते हुए कहा कि उनसे अपना खुद का देश तो संभल नहीं रहा है और वे भारत के मामलों में दखल दे रहे हैं. रंधावा ने कड़े शब्दों में कहा कि-
‘पाकिस्तान की बौखलाहट साफ नजर आ रही है. आज पाकिस्तान की 60 प्रतिशत आबादी यह चाहती है कि उनके देश पर नरेंद्र मोदी जैसा नेता राज करे, ताकि उनके बदतर हालात ठीक हो सकें. भारत की चिंता छोड़ दो, अपने देश की चिंता करो.’
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC): पार्टी नेता शेख बशीर ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और ये भारत के संविधान के अनुसार ही चलेंगे, पाकिस्तान की बयानबाजी से नहीं. नए जिलों को लेकर अगर लद्दाख की जनता में कोई ऐतराज है भी, तो वह हमारा आंतरिक मामला है. इसमें पाकिस्तान के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है.
पीडीपी (PDP): पीडीपी प्रवक्ता आदित्य गुप्ता ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के बयानों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की तुलना पाकिस्तान से नहीं की जा सकती. पाकिस्तानी सेना वहां सिर्फ इसलिए शोर-शराबा करती है ताकि भारत में अस्थिरता पैदा हो और वे खुद को अपनी जनता के सामने स्थिर दिखा सकें.
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अमित शाह के लद्दाख दौरे से उठी विकास की लहर ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है. जिस तरह से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर पाकिस्तान की दखलअंदाजी को सिरे से खारिज किया है, वह स्पष्ट संदेश है कि भारत के आंतरिक मामलों और विकास की रफ्तार को पाकिस्तान की कोई भी गीदड़भभकी रोक नहीं सकती. पाकिस्तान को अब समझ लेना चाहिए कि नए कश्मीर और लद्दाख की तरक्की उसका सबसे बड़ा डर बन चुकी है.
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