कर्नाटक के करवार बंदरगाह पर 12 मई को एक अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाज एमटीआर ओशियन (MT R Ocean) ने इराक से बिटुमिन (डामर) लेकर डेरा जमाया. इस जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 14 भारतीय, 2 सीरियाई और 1 पाकिस्तानी नागरिक शामिल था. जहाज का कप्तान भी भारतीय नागरिक था.
इस जहाज के भारत में प्रवेश के दौरान भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) और तटीय सुरक्षा पुलिस (Coastal Security Police) ने एक संयुक्त निर्णय लिया कि पाकिस्तानी और सीरियाई नागरिकों को जहाज से उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह निर्णय मौजूदा भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए लिया गया.
पुलिस निरीक्षक निश्चल कुमार ने पहले से ही स्पष्ट निर्देश दे दिए थे कि पाकिस्तान और सीरिया के नागरिकों को बंदरगाह पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा. इसके तहत जहाज के कप्तान को आदेशित किया गया कि वे दोनों देशों के नागरिकों के मोबाइल फोन जब्त करें और सुनिश्चित करें कि वे जहाज से बाहर न जाएं.
इसके बाद, पोर्ट पर सुरक्षा अधिकारियों ने जहाज की गहन जांच की और भारतीय क्रू द्वारा लाया गया बिटुमिन कार्गो उतरवाया गया. इस दौरान पूरे बंदरगाह क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और किसी भी प्रकार की असामान्य गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी.
सूत्रों के अनुसार, करवार पोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों, खासकर उन देशों के जो भारत के साथ सामरिक या राजनयिक तनाव में हैं, की एंट्री को लेकर सख्त निगरानी रखी जाती है. इस मामले में भी, किसी भी सुरक्षा जोखिम से बचने के लिए सावधानी बरती गई.
भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य और राजनीतिक तनाव के कारण ऐसे किसी भी नागरिक को भूमि पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती जिससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है. तटीय सुरक्षा पुलिस द्वारा जारी आदेश पूरी तरह से सुरक्षा एहतियात का हिस्सा था.
पोर्ट अधिकारियों ने बताया कि जब बिटुमिन की खेप को सुरक्षित रूप से उतार लिया गया, तब MT R Ocean नामक यह इराकी वाणिज्यिक जहाज करवार पोर्ट से रवाना होकर इराक की ओर लौट गया. जहाज के प्रस्थान तक सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बनी रही.
इस घटना से स्पष्ट होता है कि भारत की समुद्री सुरक्षा एजेंसियां विदेशी जहाजों और क्रू की निगरानी को लेकर बेहद सतर्क हैं. पाकिस्तान और भारत के बीच मौजूदा तनाव के मद्देनजर, सुरक्षा एजेंसियों का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सरकारी सूत्रों का मानना है कि भविष्य में ऐसे और भी निर्णय लिए जा सकते हैं जहां विदेशी नागरिकों की गतिविधियों को सीमित या नियंत्रित किया जाएगा, खासकर उन क्षेत्रों में जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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