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‘कुर्सी छोड़ते ही करीबी पर गिरी गाज!’…नीतीश के दिल्ली जाते ही बाहुबली पप्पू पांडेय पर क्यों हुआ पुलिसिया प्रहार?

रिपोर्ट- अटल बिहारी पाण्डेय


बिहार की राजनीति में जैसे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और दिल्ली कूच करने की खबरें पुख्ता हुई हैं, सूबे का सियासी और प्रशासनिक मिजाज बदला-बदला नजर आ रहा है. दरअसल खबर है कि नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले गोपालगंज के कुचायकोट से जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं.

बता दें कि कभी सत्ता के संरक्षण में ‘अजेय’ माने जाने वाले पप्पू पांडेय (JDU MLA Pappu Pandey) और उनके बाहुबली भाई सतीश पांडेय के खिलाफ पुलिस ने अब निर्णायक कानूनी घेराबंदी शुरू कर दी है. कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होते ही पुलिस ने उनके ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है.

नीतीश के ‘खास’ पप्पू पांडेय पर क्या लगे आरोप?

पप्पू पांडेय की सियासी पहचान हमेशा से सत्ता के गलियारों में मजबूती की रही है लेकिन अब स्थिति उलट है. उन पर और उनके भाई सतीश पांडेय पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध जमीन कब्जा करने और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे हैं.

वहीं स्थानीय अदालत ने विधायक समेत तीन मुख्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है. पुलिस का दावा है कि विधायक और उनके भाई ने साजिश रचकर जमीन हड़पने के खेल को अंजाम दिया है, जिसके चलते अब उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.

पुलिस की छापेमारी से विधायक ‘अंडरग्राउंड’

सोमवार की सुबह विधायक (JDU MLA Pappu Pandey) की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने जो कार्रवाई की, उसने पूरे बिहार में सनसनी फैला दी. पांच थानों की संयुक्त पुलिस टीम ने विधायक के संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन पप्पू पांडेय और उनके भाई सतीश पांडेय पुलिस के हाथ नहीं लगे. बताया जा रहा है कि वारंट की भनक लगते ही दोनों भाई भूमिगत (Underground) हो गए हैं. इस मामले में सिवान निवासी भोला पांडेय समेत चार अन्य आरोपियों को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है.

ये भी पढ़ें: नोएडा में सैलरी को लेकर भड़के हजारों कर्मचारी, पुलिस की गाड़ियां फूंकी और जमकर पथराव; इलाके में भारी तनाव

क्या बदल गया बिहार का ‘सिस्टम’?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पप्पू पांडेय पर यह कार्रवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि बिहार में होने वाले बड़े राजनीतिक परिवर्तन का संकेत है. जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मजबूती से थे, तब तक पप्पू पांडेय को सत्ता का सुरक्षा कवच प्राप्त था.

लेकिन अब जबकि नीतीश दिल्ली की राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं, बिहार का प्रशासनिक तंत्र पुराने ‘बाहुबलियों’ पर शिकंजा कसने के लिए स्वतंत्र नजर आ रहा है. अब देखना यह है कि कुचायकोट का यह ‘अजेय’ विधायक कब तक पुलिस की पकड़ से दूर रह पाता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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