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ईवी खरीदने से क्यों डर रहे लोग? सुप्रीम कोर्ट ने बताई असली वजह

Supreme Court EV Remarks: चार्जिंग स्टेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा चार्जिंग स्टेशन नहीं होंगे तो ई.वी कैसे बढ़ेंगी? कोर्ट ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट नहीं होने की वजह से लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने से हिचक रहे है.

चार्जिंग पॉइंट की कमी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से रोक रही

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने यह टिप्पणी की है. कोर्ट महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की ओर से जमीन आवंटन से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान ईवी चार्जिंग सुविधा के लिए जमीन आवंटित किए जाने को लेकर यह मुद्दा सामने आया. सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि जब उन्होंने एक व्यक्ति को इलेक्ट्रिक कार लेने कीसलाह दी तो उसने कहा कि ईवी अच्छी है, लेकिन जहां वह रहता है या जहां वह जाता है, वहां चार्जिंग की सुविधा कहां है? कोर्ट ने कहा कि चार्जिंग पॉइंट की कमी ही लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से रोक रही है.

अदालत ने कहा कि,

अगर देश मे प्राकृतिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की ओर से बदलाव न हो तो इसके बाद जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होगी. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की बात करने से बदलाव नहीं आएगा. जब तक चार्जिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती. जस्टिस नरसिम्हा ने सुप्रीम कोर्ट में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी कार सुप्रीम कोर्ट में पार्क करता है, तो मामले की सुनवाई पूरी होने तक वाहन चार्ज किया जा सकता है.

जस्टिस नरसिम्हा: फैसला मनमाना नहीं बल्कि नीति के तहत लिया गया

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से ऐसी सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि मुवक्किल की जमीन विवादित भूखंड से लगी हुई है, और वहां पहले से उद्योग चल रहा है. याचिकाकर्ता ने अपने उद्योग के विस्तार के लिए जमीन के एक हिस्से की मांग की थी. जस्टिस नरसिम्हा ने स्पष्ट किया कि ईवी सुविधा के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला मनमाना नहीं बल्कि नीति के तहत लिया गया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया है कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत कर बाकी उपलब्ध जमीन के आवंटन की संभवना तलाशे, ताकि उसकी पहुच और उद्योग के विस्तार से जुड़ी चिंताओं का समाधान हो सकें.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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