सदन की कार्यवाही ढाई बजे तक स्थगित
मणिपुर हिंसा, दिल्ली के सेवा मामले पर अध्यादेश के अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद सरकार द्वारा उसके स्थान पर विधेयक लाए जाने और सदन की कार्यवाही से कुछ अंशों को हटा देने के मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को आरंभ होने के कुछ ही देर बाद दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. सुबह जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई सभापति जगदीप धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और उसके बाद वह सदस्यों को बृहस्पतिवार को कार्य मंत्रण समिति की बैठक में विधेयकों पर चर्चा के लिए आवंटित समय का उल्लेख किया.
इस दौरान उन्होंने जैसे ही दिल्ली के उपराज्यपाल को शक्तियां प्रदान करने के प्रावधान वाले ‘राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक’ का जिक्र किया आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह ने इसका विरोध किया और इस कदम को ‘गैर संवैधानिक’ बताया। भारत राष्ट्र समिति के के केशव राव ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि मामला अदालत के विचाराधीन है, ऐसे में इस विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकती.
सभापति ने इस पर कहा कि यह भ्रम है कि इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि इस सदन को किसी भी मुद्दे पर चर्चा कराने का अधिकार है। इसी बीच, कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाया। इसके समर्थन में अन्य विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की. तिवारी अभी यह मुद्दा उठा ही रहे थे कि सभापति ने तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन को व्यवस्था के प्रश्न के उठाने का समय दिया. डेरेक ने बृहस्पतिवार को सदन की कार्यवाही से उनके संबोधनों के अंशों को हटाए जाने का मामला उठाया. इसके बाद सदन में शोरगुल व हंगामा आरंभ हो गया.
हंगामा थमते न देख सभापति धनखड़ ने 11 बजकर 18 मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजकर 30 मिनट तक के लिए स्थगित कर दिया। मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मणिपुर मुद्दे पर संसद में बयान नहीं देने और दिल्ली के सेवा मामले पर अध्यादेश के अदालत के विचाराधीन होने के बावजूद सरकार द्वारा उसके स्थान पर विधेयक लाए जाने के विरोध में विपक्षी दलों के कई नेताओं ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक का बहिष्कार किया था.
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ द्वारा लिखित में विपक्षी नेताओं का विरोध दर्ज नहीं किए जाने के बाद कांग्रेस, वाम दलों, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, राजद, राकांपा और आप सहित अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने बीएसी की बैठक से बहिर्गमन किया. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने भी बहिर्गमन में उनका साथ दिया.
-भारत एक्सप्रेस
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