भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि सबसे युवा देश भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘अमृत काल’ के सारथी के रूप में देश के युवाओं का जिक्र करते हैं. पीएम मोदी ने भारतीय युवाओं के दृढ़ संकल्प को ‘अतुलनीय’ बताते हुए एक प्राचीन संस्कृत श्लोक के जरिए यह संदेश दिया है कि जब युवा कुछ ठान लेते हैं, तो उसे पूरा करके ही दम लेते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, ‘भारतवर्ष की युवाशक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है. हमारे युवा साथी जो ठान लेते हैं, वो करके दिखाते हैं. यही वजह है कि आज हमारा देश अपने सपनों को साकार कर रहा है.’
ट्वीट के आखिर में उन्हें संस्कृत श्लोक लिखा:
‘न वा उ मां वृजने वारयन्ते न पर्वतासो यदहं मनस्ये .
मम स्वनात् कृधुकर्णो भयात एवेदनु द्यून्किरणः समेजात् ..’
इस श्लोक का भावार्थ यह है कि जब मैं (संकल्पित मन) कुछ करने का मन बना लेता हूं, तो न कोई बाधा और न ही विशाल पर्वत मुझे रोक सकते हैं. मेरे इस संकल्प की गर्जना से वे भी भयभीत हो जाते हैं जो सुनने में अक्षम हैं.”
ये श्लोक आज के भारत की उस तस्वीर को पेश करता है जहां स्टार्टअप्स से लेकर स्पेस मिशन और ओलंपिक के मैदान से लेकर डिजिटल क्रांति तक, युवा हर बाधा को पार कर रहे हैं. पीएम का यह ट्वीट उस समय आया है जब भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है.
प्रधानमंत्री का मानना है कि आज का युवा केवल ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहा है. देश में बढ़ते यूनिकॉर्न्स और पेटेंट फाइलिंग में आई तेजी इस बात का सबूत है. मोदी जी ने अक्सर अपने संबोधनों में कहा है कि 21वीं सदी भारत की सदी है और इसके पीछे मुख्य इंजन हमारी डेमोग्राफिक डिविडेंड है.
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-भारत एक्सप्रेस
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