देश

अंकिता भंडारी से उन्नाव कांड तक…राहुल गांधी का सवाल- ‘आखिर किस VIP को बचा रही है सरकार?’

रिपोर्ट- प्रशांत


राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र और राज्यों की बीजेपी सरकारों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए यह साफ कर दिया है कि जिसे भाजपा ‘डबल इंजन’ की सरकार कहती है, वह असल में आम आदमी के लिए तबाही की रफ्तार बन चुकी है. राहुल का कहना है कि आज देश में भ्रष्टाचार, सत्ता का घमंड और वीआईपी कल्चर इस कदर हावी हो गया है कि गरीब और मध्यम वर्ग की जान की कोई कीमत ही नहीं रह गई है.

न्याय के नाम पर ‘VIP’ को बचाने का खेल?

राहुल गांधी ने उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए व्यवस्था की खामियों पर गहरी चोट की है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वो कौन सा ‘VIP’ है जिसे बचाने के लिए सत्ता अपनी पूरी ताकत लगा रही है? उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन्नाव कांड की याद दिलाते हुए कहा कि देश देख चुका है कि कैसे सत्ता के नशे में चूर लोग अपराधियों को ढाल देते हैं, जबकि पीड़िता को न्याय पाने के लिए अपनी जान तक की बाजी लगानी पड़ती है. राहुल का सीधा सवाल है कि क्या इस देश में कानून सबके लिए कभी बराबर होगा?

बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल

देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही बदहाली की खबरों पर दुख जताते हुए राहुल ने कहा कि इंदौर में जहरीला पानी पीने से लोगों की जान जा रही है, तो वहीं दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में लोग दूषित सप्लाई के कारण बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं.

उन्होंने अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति पर भी कड़ा प्रहार किया. राहुल ने कहा:

“जब सरकारी अस्पतालों में चूहों के कुतरने से नवजातों की जान जाती है या घटिया कफ सिरप से बच्चों की मौत होती है, तो इसे सिर्फ ‘लापरवाही’ कहना गलत होगा. यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की मार है.”

विकास या विनाश?

पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर के मुद्दे पर राहुल ने ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ (सांठगांठ वाली पूंजीवाद) पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान की अरावली पहाड़ियां हों या देश के अन्य प्राकृतिक संसाधन, अरबपतियों के फायदे के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. जंगल काटे जा रहे हैं और पहाड़ खोखले किए जा रहे हैं, जिसका नतीजा प्रदूषण और आपदा के रूप में आम जनता भुगत रही है.

राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि आज पुल गिर रहे हैं, सड़कें धंस रही हैं और आए दिन ट्रेन हादसे हो रहे हैं, लेकिन सरकार का रवैया केवल ‘फोटो-ऑप’ (तस्वीरें खिंचवाना) और मुआवजे का ऐलान करने तक सीमित है. उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि यह डबल इंजन सरकार सिर्फ कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए चल रही है, जबकि आम हिंदुस्तानी के लिए यह विकास नहीं, बल्कि हर दिन उसकी जिंदगी को कुचलने वाला तंत्र बन गया है.

ये भी पढ़ें: मध्यप्रदेश में शर्मसार हुई इंसानियत; कहीं मंदिर के बाबा ने लांघी मर्यादा, तो कहीं पड़ोसी ने मासूम बच्ची को बनाया निशाना

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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