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सिल्वेनस संगी लिंगदोह की पुण्यतिथि पर एक खासी प्रतिभा को याद किया

डॉ. सिल्वेनस संगी लिंगदोह की सातवीं पुण्यतिथि थी. 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था. फादर संगी खासी लोगों के बीच एक घरेलू नाम था. वह अभी भी समुदाय में लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं. वह एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने खासी समाज और विशेष रूप से री भोई के लोगों के लिए कई पहल की. उन्होने अपने स्थान मावबरी और अपने क्षेत्र के लिए उनका प्यार अपार था.

सिल्वेनस संगी लिंगदोह का जीवन
दरअसल सिल्वेनस संगी लिंगदोह एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे. ये एक पुजारी, राजनीतिज्ञ, लेखक और विद्वान थे. विदेश में पढ़ाई के दौरान भी वे अपनी बौद्धिक कुशाग्रता के लिए जाने जाते थे. एक कैथोलिक ईसाई के रूप में वे अपने विश्वास के साथ प्रतिबद्ध थे. एक धार्मिक के रूप में वह उस जीवन के लिए प्रतिबद्ध थे जिसे उसने चुना था और एक प्रचारक और एक पादरी के रूप में अपना समय दिया, 1960, 1970 और 1980 के दशक में उन्होने हमेशा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते देखा गया था.

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सिल्वेनस संगी लिंगदोह एक उत्कृष्ट छात्र थे जिन्होंने अपना समय अध्ययन के लिए समर्पित किया और उन्होंने कई लोगों की समझ और कल्पना से परे ज्ञान इकट्ठा किया। उन्होंने लैटिन, ग्रीक, हेब्रू और अरामाईक और कई अन्य भाषाओं में महारत हासिल की. जिसके बाद ज्ञान को सही परिप्रेक्ष्य में रखने की अपनी सादगी के साथ वे एक ऐसे शिक्षक बन गए. जिनकी बहुत सराहना की गई और वे अपने बुढ़ापे में शिक्षण कार्यक्रम जारी रखना चाहते थे. वह एक प्रतिभाशाली शिक्षक थे और उन्होंने ज्ञान फैलाने के जुनून के साथ जो कुछ भी जानते थे उसे पढ़ाया.

1976 में शुरू किया था अखबार
फादर खासी साहित्य में संगी का योगदान निःसंदेह बहुत अधिक है. उनकी खासी पुस्तकें भाषाई शब्दों और वाक्यांशों से समृद्ध हैं और उनमें खासी संस्कृति, मिथकों, लोककथाओं और खासी रीति-रिवाजों और परंपराओं पर ज्ञान का समुद्र है. उनका प्रसिद्ध अखबार का सुर शिपारा था जो उन्होंने 1976 में शुरू किया था और जो लगभग दो दशकों तक चला. जो राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने में बहुत प्रभावी था. इसने लोगों के लिए एक धार्मिक और नैतिक शिक्षा के रूप में भी काम किया.

-भारत एक्सप्रेस 

Amzad khan

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