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बौद्ध धर्म के ‘महा-स्कॉलर’ और दलाई लामा के ‘लंगोटिया यार’ प्रोफेसर रॉबर्ट थर्मन का निधन, पीएम मोदी ने लिखा ऐसा भावुक पोस्ट

भारत के ‘आजीवन मित्र’, दुनिया के सबसे प्रख्यात अमेरिकी बौद्ध विद्वान और देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित प्रोफेसर रॉबर्ट ए. एफ. थर्मन का 84 वर्ष की आयु में वुडस्टॉक (न्यूयॉर्क) में निधन (Robert Thurman passes away) हो गया है. उनके निधन की खबर से भारत सहित पूरे विश्व के कूटनीतिक और आध्यात्मिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (18 जून 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा करते हुए प्रोफेसर थर्मन को श्रद्धांजलि दी और उन्हें भारत का एक ऐसा सच्चा दोस्त बताया, जिसने भगवान बुद्ध के विचारों को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

 

पीएम मोदी का भावुक संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोफेसर थर्मन के साथ अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, “बौद्ध धर्म के जाने-माने स्कॉलर, एक महान शिक्षक और भारत के हमेशा के मित्र रॉबर्ट ए. एफ. थर्मन के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है. अपने कार्यों से उन्होंने बौद्ध विचारों को दुनिया भर में मशहूर किया और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद के मजबूत सेतु स्थापित किए. मुझे कुछ साल पहले (21 जून 2023) न्यूयॉर्क शहर में हुई हमारी मुलाकात अच्छी तरह याद है, जहां हमारी वैश्विक चुनौतियों पर बहुत अच्छी बातचीत हुई थी.”

दलाई लामा के पक्के यार हैं थर्मन (Robert Thurman passes away)

प्रोफेसर रॉबर्ट थर्मन की शख्सियत बेहद विशाल थी. वह तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के सबसे करीबी और लंबे समय तक मित्र रहे. इसके अलावा, वह प्रसिद्ध हॉलीवुड अभिनेत्री उमा थर्मन (Uma Thurman) के पिता भी थे.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के धर्म विभाग में इंडो-तिब्बती बौद्ध स्टडीज के प्रोफेसर रहे थर्मन ने तिब्बती बौद्ध धर्म की कई दुर्लभ किताबों को अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया था, जिसमें विमलकीर्ति सूत्र प्रमुख है. ‘टैक्सस’ और न्यूयॉर्क मैगजीन ने उन्हें अमेरिका के 25 सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शुमार किया था.

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न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास ने जताया गहरा शोक

तिब्बत हाउस यूएस ने बुधवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि प्रोफेसर थर्मन ने 16 जून की सुबह अंतिम सांस ली. न्यूयॉर्क में भारत के वाणिज्य दूतावास (Consulate General) ने भी शोक जताते हुए कहा कि इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन के लिए प्रोफेसर थर्मन के जीवन भर के समर्पण ने भगवान बुद्ध के कालजयी ज्ञान को आधुनिक पीढ़ियों तक पहुंचाने और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत की गहरी समझ को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई.

-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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