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Dalai Lama

पद्मश्री सम्मानित अमेरिकी बौद्ध विद्वान और भारत के करीबी मित्र Robert A. F. Thurman का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए बौद्ध विचारों का वैश्विक दूत बताया...

China Tibet Conflict: 1950 में सैन्य आक्रमण और दबावपूर्ण '17 सूत्री समझौते' के जरिए चीन ने तिब्बत की स्वतंत्रता को खत्म कर उसे अपना हिस्सा बना लिया. इस घटना के बाद 1959 में हुए विद्रोह ने दलाई लामा को भारत में शरण लेने पर मजबूर किया, जिससे यह मुद्दा आज भी एक अंतरराष्ट्रीय विवाद बना हुआ है.

तिब्बत विद्रोह दिवस: 1959 के ल्हासा विद्रोह की याद, जहां तिब्बतियों ने चीनी अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई. 'तिब्बत में सात वर्ष' पुस्तक तिब्बत के स्वर्णिम अतीत की गवाही देती है.

Dalai Lama: तिब्बत से निर्वासित धर्मगुरु और अध्यात्मकि नेता दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड से सम्मानित किया गया है. दलाई लामा को मिले इस सम्मान से चीन बौखला गया है. चीन ने कहा कि ग्रमी अवार्ड का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिसका वो कड़ा विरोध करता है.

दलाई लामा, जैन आचार्य लोकेश और मलाला यूसुफजई को 9 अगस्त 2025 को लंदन में 'अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार' से सम्मानित किया जाएगा. यह पुरस्कार उन्हें युद्ध, हिंसा और परमाणु खतरे के बीच विश्व में शांति स्थापित करने के उनके अद्भुत प्रयासों के लिए दिया जाएगा.

Sunny Deol: सनी ने हाल ही में दलाई लामा के साथ एक फोटो शेयर की, जिसमें वे उनके सामने आदर से झुकते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं दलाई लामा सनी के हाथों को बड़े प्यार से अपने माथे पर लगाते हुए दिख रहे हैं.

ग्यालवा रिनपोछे के नाम से जाने जाने वाले 14वें दलाई लामा तिब्बत के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु और प्रमुख नेता हैं. उनका जन्म 6 जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के एक छोटे से कृषक गांव ताकस्तेर में हुआ था.

चीन के दावों को ठेंगा दिखाते वर्तमान दलाई लामा ने साफ कर दिया है कि पुनर्जन्म परंपरा जारी रहेगी. उनके उत्तराधिकारी का चयन भारत स्थित बौद्ध धर्म के सबसे बड़े कार्यालय से होगा.

Dalai Lama की 90वीं जन्मदिन की तैयारियां जोरों पर हैं और इस दौरान उनके उत्तराधिकारी की घोषणा को लेकर चर्चाएं तेज हैं. दलाई लामा ने कहा है कि उनके उत्तराधिकारी का चयन तिब्बत के लोगों द्वारा किया जाएगा.

धर्मशाला में दलाई लामा के 90वें जन्मदिन पर अंतरधार्मिक नेताओं ने शांति और संवाद की अपील की. आचार्य लोकेश मुनि ने कहा, "धर्म जोड़ता है, हिंसा का कोई स्थान नहीं. हमें बुद्ध चाहिए, युद्ध नहीं."