Samrat Choudhary was picked as Bihar CM
Samrat Choudhary CM selection: 14 अप्रैल 2026 का दिन बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम के रूप में याद किया जाएगा. मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में एनडीए ने अपने नए नेतृत्व का ऐलान करते हुए सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary CM) को विधायक दल का नेता चुन लिया है. बात दें कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 15 अप्रैल को आयोजित किया जा सकता है, जिसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं.
हालांकि, सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. कई विश्लेषक इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीतिक चाल के रूप में देख रहे हैं, जिसमें एक बार फिर ओबीसी नेतृत्व को आगे बढ़ाकर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है. वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि इसके पीछे केवल जातीय गणित ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक मजबूती जैसे अन्य कारण भी शामिल हैं.
बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) का जन्म मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था. वे कोइरी (कुशवाहा) जाति से आते हैं और भारतीय जनता पार्टी में एक प्रमुख ओबीसी चेहरा माने जाते हैं. राजनीति के जानकारों के अनुसार, उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि ने भी उनके राजनीतिक कद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है.
बिहार की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है. राज्य की कुल आबादी में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है, जबकि मतदाता सूची में यह संख्या करीब 2 से 2.2 करोड़ तक आंकी जाती है. इसी वजह से यह वर्ग हर चुनाव में सत्ता समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है. सम्राट चौधरी को लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण के कोइरी समुदाय का प्रतिनिधि चेहरा भी माना जाता है. इस सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के जरिए बीजेपी बिहार के पिछड़ा वर्ग मतदाता आधार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम करती दिखती है.
बिहार की राजनीति में इस समय यह चर्चा जोरों पर है कि क्या सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के रूप में बीजेपी की पसंद माना जाए, या फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से शीर्ष नेतृत्व के लिए कोई और नाम प्राथमिकता में था (Bihar CM selection political strategy BJP RSS). इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
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भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अक्सर मुख्यमंत्री पद को लेकर अपने फैसलों से राजनीतिक हलकों को चौंकाते रहे हैं. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नेतृत्व चयन के दौरान कई बार ऐसे नाम सामने आए, जिनकी पहले से कोई स्पष्ट चर्चा नहीं थी, लेकिन अंतिम निर्णय ने सभी को हैरान कर दिया. हालांकि, यह भी सच है कि सम्राट चौधरी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. वे विधायक और मंत्री रह चुके हैं, और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन को मजबूती देने का काम किया है.
-भारत एक्सप्रेस
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