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शिव विहार मेट्रो स्टेशन से ट्रैक्टर-ट्रॉली तक का सफर, टूटी सड़कों और गड्ढों से बेहाल लोग

दिल्ली मेट्रो का जाल भले ही राजधानी से गाज़ियाबाद तक चमचमाती ट्रेनें दौड़ा रहा हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है. शिव विहार पिंक लाइन का अंतिम स्टेशन है और यहां तक पहुंचना आम लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं हैं. बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब स्टेशन से बाहर निकलते ही यात्रियों को ऑटो या ई-रिक्शा नहीं, बल्कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में सफर करना पड़ता है. शिव विहार स्टेशन के पास से गुजरने वाला नेशनल हाईवे-709B दिल्ली को बागपत, सहारनपुर और यमुनोत्री धाम से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है. लेकिन बरसात के दिनों में इस सड़क का हाल देखकर यह कहना मुश्किल होता है कि यह नेशनल हाईवे है. जगह-जगह गहरे गड्ढे और बारिश का पानी इसे तालाब में तब्दील कर देते हैं. वाहन चालक कहते हैं कि यहां गाड़ी चलाने से ज्यादा हिम्मत की ज़रूरत होती है.

लोनी, ट्रॉनिका सिटी, करावल नगर, शांति नगर और इंद्रापुरी जैसे इलाकों से रोज़ाना हजारों लोग इस स्टेशन तक आते हैं. बरसात के मौसम में ई-रिक्शा और ऑटो का सफर लगभग नामुमकिन हो जाता है. मजबूरी में लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में लटककर स्टेशन तक पहुंचते हैं. एक यात्री ने बताया, ‘पहले तक तो लोग ऑटो में आते-जाते थे, लेकिन अब हालत ऐसे हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉली ही सबसे सुरक्षित साधन लगती है.’

हालात से समझौता कर चुके लोग

स्टेशन से बाहर निकलते ही लोग गड्ढों और कीचड़ से जूझते हैं. सभापुर पुश्ता रोड के पास रहने वाले एक शख्स ने कहा, ‘यहां हर बार बारिश में यही हाल होता है. अब तो हम लोग शिकायत भी नहीं करते, क्योंकि कोई सुनने वाला नहीं है.’ लोगों की बेफिक्री उनके समझौते को दर्शाती है, लेकिन इससे समस्या की गंभीरता कम नहीं होती. शिव विहार मेट्रो स्टेशन के नीचे होटल चलाने वाले रवि पांचाल अपनी परेशानियों को बयां करते हुए कहते हैं, ‘सोचा था मेट्रो स्टेशन के नीचे धंधा खूब चलेगा, लेकिन यहां तो हालात ही उलटे निकले. बरसात हो तो पानी भर जाता है और बरसात न हो तो धूल उड़ती है.’

वे बताते हैं कि कई बार होटल का किराया निकालना भी मुश्किल हो जाता है. खराब सड़कें और अव्यवस्थित व्यवस्था न केवल यात्रियों बल्कि व्यापारियों की रोज़ी-रोटी पर भी भारी पड़ रही है.

प्रशासन पर उठे सवाल

दिल्ली मेट्रो ने भले ही लाखों यात्रियों के लिए तेज़ और समय पर ट्रेन सेवा उपलब्ध करा दी हो, लेकिन स्टेशन तक की यात्रा अभी भी कठिन बनी हुई है. यह स्थिति स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाती है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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