देश

गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं, बड़ी आफत! अब दिल्ली से संचालित होगा साउथ एशिया हब; 90% आबादी को बचाने का मास्टर प्लान तैयार

दक्षिण एशिया में गर्मी का असर अब सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहा. बढ़ते तापमान ने लोगों की सेहत, रोज़गार और बुनियादी ढांचे पर बड़ा दबाव डालना शुरू कर दिया है. इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए, अब ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क (GHHIN) का साउथ एशिया हब नई दिल्ली में शुरू किया गया है. इसका मेजबान है काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW), और इसमें IITM और IMD जैसे संस्थानों के साथ SFC, NRDC, BRAC JPGSPH और UNESCAP जैसे प्रमुख भागीदार शामिल हैं.

अब गर्मी का ध्यान क्यों जरूरी है?

वैज्ञानिक रिपोर्टों और स्थानीय अनुभवों से साफ पता चलता है कि दक्षिण एशिया तेजी से गर्म हो रहा है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 11 साल में रिकॉर्ड किया गया तापमान अब तक का सबसे ऊँचा है. अकेले भारत में 57% जिले पहले से ही बहुत उच्च गर्मी के जोखिम में हैं. बांग्लादेश में महसूस किए जाने वाले तापमान में पिछले चार दशकों में 4.5 डिग्री की वृद्धि हुई है, जबकि नेपाल और भूटान जैसे हिमालयी देशों में भी लगातार 40 डिग्री से ऊपर तापमान दर्ज हो रहा है.

2030 तक दक्षिण एशिया की करीब 90% आबादी भीषण गर्मी का सामना कर सकती है. लेकिन अभी भी क्षेत्रीय नीतियों और स्वास्थ्य चेतावनी प्रणालियों में तालमेल कम है. यही वजह है कि यह हब ज्ञान साझा करने, पायलट प्रोजेक्ट्स चलाने और हीट-एक्शन प्लान तैयार करने पर काम करेगा.

हब का काम कैसे होगा?

हब मुख्य रूप से चार काम करेगा,

  • नेटवर्क बनाना: सरकार, शोधकर्ता, शहरी नियोजन और स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़कर क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाना.
  • साक्ष्य से नीति बनाना: आंकड़ों और शोध को सीधे नीतियों में बदलना ताकि स्थानीय स्तर पर असर दिखे.
  • हीट-हेल्थ अर्ली वार्निंग सिस्टम: समय पर चेतावनी देकर लोगों और समुदायों को सुरक्षित रखना.
  • सफल मॉडल साझा करना: स्थानीय अनुभवों और उपायों को दस्तावेज़ करना और उन्हें पूरे दक्षिण एशिया में फैलाना.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

डॉ. अरुणाभा घोष (CEEW) कहते हैं, “भीषण गर्मी सिर्फ मौसम की समस्या नहीं, यह स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है. इस हब से हम ताप विज्ञान को समुदायों के लिए असरदार उपायों में बदल सकते हैं.”
अलेजांद्रो साएज रियल (GHHIN) जोड़ते हैं, “साउथ एशिया हब वैश्विक ज्ञान और स्थानीय अनुभवों को जोड़ने का पुल बनेगा. इससे गर्मी से सबसे प्रभावित शहर और समुदाय सुरक्षित रह सकेंगे.”

डॉ. फरजाना मिशा (BRAC JPGSPH) ने कहा,

“भीषण गर्मी अब भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि आज का वास्तविक खतरा है. यह हब क्षेत्रीय सहयोग और साझा कार्रवाई के जरिए लोगों की सुरक्षा में मदद करेगा.”

जैसे-जैसे गर्मी का खतरा बढ़ रहा है, यह हब विखंडित प्रयासों की बजाय एक समन्वित और विज्ञान-आधारित रणनीति तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है. अगले कुछ वर्षों में यह 60 से ज्यादा संस्थानों को जोड़ेगा, 500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करेगा और पूरे दक्षिण एशिया में प्रभावी हीट-एक्शन प्लान तैयार करेगा.

ये भी पढ़ें: ऐतिहासिक क्षण: डॉ. मेनका गुरुस्वामी बनीं भारत की पहली LGBTQ+ सांसद

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

1 अक्टूबर से बदल जाएगा रसोई गैस का नियम! सब्सिडी वाला LPG सिलेंडर चाहिए तो कराना होगा बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन

LPG Subsidy New Rules: घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को सरकारी सब्सिडी के साथ निर्धारित कीमत पर…

4 hours ago

‘साहब को सेट करने’ के नाम पर मांगी 50 हजार की घूस! दिल्ली CBI की रेड में बेनकाब हुआ दलाल

दिल्ली में 50 हजार की रिश्वत लेते विक्रम उर्फ राधे को सीबीआई ने रंगे हाथों…

4 hours ago

अंडमान के पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए बनेगा विजन डॉक्यूमेंट

Dr Dinesh Sharma: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक…

4 hours ago

खुद को खुद से बेहतर बना रहा है AI! बस एक साल बचा है… क्या इंसानी दुनिया का अंत होने वाला है?

एआई के जनक माने जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने एक बार फिर…

4 hours ago

ढलती उम्र में प्यार फिर मर्डर! 24 घंटों में कन्नौज पुलिस ने सुलझाई कत्ल की गुत्थी

कन्नौज के तिर्वा में 60 वर्षीय प्रवेश दुबे की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या. प्रेम संबंध…

4 hours ago

ग्रीन फैशन से बदलेगी देश की तस्वीर! पीएम मोदी बोले- ‘सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, भविष्य की जरूरत’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) भारत की परंपरा और…

4 hours ago