दक्षिण एशिया में गर्मी का असर अब सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहा. बढ़ते तापमान ने लोगों की सेहत, रोज़गार और बुनियादी ढांचे पर बड़ा दबाव डालना शुरू कर दिया है. इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए, अब ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क (GHHIN) का साउथ एशिया हब नई दिल्ली में शुरू किया गया है. इसका मेजबान है काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW), और इसमें IITM और IMD जैसे संस्थानों के साथ SFC, NRDC, BRAC JPGSPH और UNESCAP जैसे प्रमुख भागीदार शामिल हैं.
अब गर्मी का ध्यान क्यों जरूरी है?
वैज्ञानिक रिपोर्टों और स्थानीय अनुभवों से साफ पता चलता है कि दक्षिण एशिया तेजी से गर्म हो रहा है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 11 साल में रिकॉर्ड किया गया तापमान अब तक का सबसे ऊँचा है. अकेले भारत में 57% जिले पहले से ही बहुत उच्च गर्मी के जोखिम में हैं. बांग्लादेश में महसूस किए जाने वाले तापमान में पिछले चार दशकों में 4.5 डिग्री की वृद्धि हुई है, जबकि नेपाल और भूटान जैसे हिमालयी देशों में भी लगातार 40 डिग्री से ऊपर तापमान दर्ज हो रहा है.
2030 तक दक्षिण एशिया की करीब 90% आबादी भीषण गर्मी का सामना कर सकती है. लेकिन अभी भी क्षेत्रीय नीतियों और स्वास्थ्य चेतावनी प्रणालियों में तालमेल कम है. यही वजह है कि यह हब ज्ञान साझा करने, पायलट प्रोजेक्ट्स चलाने और हीट-एक्शन प्लान तैयार करने पर काम करेगा.
हब का काम कैसे होगा?
हब मुख्य रूप से चार काम करेगा,
- नेटवर्क बनाना: सरकार, शोधकर्ता, शहरी नियोजन और स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़कर क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाना.
- साक्ष्य से नीति बनाना: आंकड़ों और शोध को सीधे नीतियों में बदलना ताकि स्थानीय स्तर पर असर दिखे.
- हीट-हेल्थ अर्ली वार्निंग सिस्टम: समय पर चेतावनी देकर लोगों और समुदायों को सुरक्षित रखना.
- सफल मॉडल साझा करना: स्थानीय अनुभवों और उपायों को दस्तावेज़ करना और उन्हें पूरे दक्षिण एशिया में फैलाना.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
डॉ. अरुणाभा घोष (CEEW) कहते हैं, “भीषण गर्मी सिर्फ मौसम की समस्या नहीं, यह स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है. इस हब से हम ताप विज्ञान को समुदायों के लिए असरदार उपायों में बदल सकते हैं.”
अलेजांद्रो साएज रियल (GHHIN) जोड़ते हैं, “साउथ एशिया हब वैश्विक ज्ञान और स्थानीय अनुभवों को जोड़ने का पुल बनेगा. इससे गर्मी से सबसे प्रभावित शहर और समुदाय सुरक्षित रह सकेंगे.”
डॉ. फरजाना मिशा (BRAC JPGSPH) ने कहा,
“भीषण गर्मी अब भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि आज का वास्तविक खतरा है. यह हब क्षेत्रीय सहयोग और साझा कार्रवाई के जरिए लोगों की सुरक्षा में मदद करेगा.”
जैसे-जैसे गर्मी का खतरा बढ़ रहा है, यह हब विखंडित प्रयासों की बजाय एक समन्वित और विज्ञान-आधारित रणनीति तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है. अगले कुछ वर्षों में यह 60 से ज्यादा संस्थानों को जोड़ेगा, 500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करेगा और पूरे दक्षिण एशिया में प्रभावी हीट-एक्शन प्लान तैयार करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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