देश

Supreme Court: थिएटर में बाहर का खाना ले जाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सिनेमा हॉल जिम नहीं, मनोरंजन की जगह है

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सिनेमा हॉल के पास अंदर खाने-पीने की चीजों की बिक्री और बाहर से खाने-पीने के सामान ले जाने के लिए नियम और शर्तें तय करने का अधिकार है. प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक सिनेमा हॉल के मालिक को सिनेमा हॉल में खाने-पीने की चीजों के प्रवेश को विनियमित करने का अधिकार है. पीठ में शामिल न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि, जो उपलब्ध है उसका उपभोग करना पूरी तरह से फिल्म देखने वालों की पसंद पर है. पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि सिनेमाघर निजी संपत्ति हैं, और मालिक निषेध के अधिकारों पर निर्णय ले सकता है. इसमें कहा गया है कि अगर जलेबी को मूवी हॉल में ले जाना है तो मालिक इस पर आपत्ति कर सकता है, क्योंकि जलेबी खाने के बाद व्यक्ति कुर्सी से हाथ पोंछ सकता है और उसे गंदा कर सकता है.

पीठ ने कहा कि सिनेमा हॉल मालिक ऐसे नियम और शर्तें रखने का हकदार है, जो वह उचित समझे, यदि वह सार्वजनिक हित या सुरक्षा के विपरीत नहीं हैं. जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय ने राज्य के मल्टीप्लेक्स/सिनेमा हॉल के मालिकों को निर्देश दिया था कि वह सिनेमाघर जाने वालों को थिएटर के अंदर अपने स्वयं के खाद्य पदार्थ और पानी ले जाने पर रोक न लगाएं. हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सिनेमा हॉल मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

वरिष्ठ अधिवक्ता के.वी. विश्वनाथन ने तर्क दिया कि चूंकि सिनेमा हॉल निजी संपत्तियां हैं, वह प्रवेश के अधिकार सुरक्षित रखते हैं और निषेध सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और अन्य स्थानों के अलावा हवाई अड्डों पर भी देखे जा सकते हैं. मूल याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सिनेमा टिकट मूवी देखने वाले और सिनेमा हॉल के बीच अनुबंध का प्रतिनिधित्व करता है, चूंकि टिकट पर प्रतिबंध नहीं छपा है, इसलिए बाहर के भोजन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है.

पीठ ने कहा कि सिनेमा को प्रवेश आरक्षित करने का अधिकार है और सिनेमा मालिकों को अपने स्वयं के खाद्य और पेय पदार्थ बेचने का अधिकार है. इसने आगे सवाल किया कि उच्च न्यायालय कैसे कह सकता है कि वह सिनेमा हॉल के अंदर कोई भी खाना ला सकते हैं. विश्वनाथन ने तर्क दिया कि मूवी हॉल में भोजन खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है और सिनेमा हॉल सार्वजनिक संपत्ति नहीं हैं.

ये भी पढ़ें: SC Verdict on Demonetisation: ‘नोटबंदी गैरकानूनी थी, कानून लाकर इस पर फैसला होना चाहिए था’- जानिए जस्टिस नागरत्ना ने और क्या-क्या कहा

पीठ ने कहा कि सभी के लिए स्वच्छ पेयजल मुफ्त में उपलब्ध है और शिशुओं के लिए भोजन की भी अनुमति है, लेकिन परिसर के अंदर हर तरह के भोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इसने आगे टिप्पणी की कि इस बात पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है कि राज्य की नियम बनाने की शक्ति सिनेमा हॉल मालिकों के व्यवसाय, व्यापार आदि करने के मौलिक अधिकार के अनुरूप होनी चाहिए.

शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने अधिकार क्षेत्र के प्रयोग की सीमा का उल्लंघन किया और मल्टीप्लेक्स और मूवी थिएटरों को निर्देश दिया कि वह मूवी देखने वालों को अपने स्वयं के भोजन और पेय पदार्थों को मूवी हॉल में ले जाने से न रोकें.

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

Recent Posts

पंजाब और सीमावर्ती राज्यों में बढ़ती नशे की समस्या: चुनौतियाँ और समाधान

Punjab Drug Problem: पंजाब और सीमावर्ती राज्यों में नशे की समस्या जटिल और बहुस्तरीय है.…

7 minutes ago

गुजरात दौरे पर गृह मंत्री अमित शाह, रूपल में रखेंगे 81 फुट ऊंची भव्य शिव प्रतिमा की आधारशिला

Amit Shah Gujarat Visit: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को गुजरात में…

21 minutes ago

अगले 12 घंटे, 13 राज्य…मूसलाधार बारिश से मचेगा तांडव! 65 की स्पीड से तूफान का खौफनाक अलर्ट

IMD Weather Alert Today: बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव और चक्रवाती परिसंचरण के चलते…

31 minutes ago

दिल्ली में आज फिर से बबाल! CJP के तिरंगा मार्च से थम जाएगी रफ्तार, ट्रैफिक पुलिस का अलर्ट देखा क्या?

दिल्ली के कनॉट प्लेस में 16 अक्टूबर को CJP के विरोध प्रदर्शन और तिरंगा मार्च…

45 minutes ago

नवरात्र के छठे दिन शोभन योग का अद्भुत संयोग! जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि समेत आज का पूरा पंचांग

आज 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी की…

1 hour ago

नवरात्र के छठे दिन 4 राशियों के ग्रहों में बड़ा बदलाव: वृषभ राशि को लाभ तो वृश्चिक-मकर रहें सावधान

16 अक्टूबर 2026 को शोभन योग और मां कात्यायनी की आराधना के बीच सभी 12…

2 hours ago