सुप्रीम कोर्ट.
उत्तर प्रदेश सहायक शिक्षक भर्ती 2019 में चयनित अभ्यर्थियों की सूची को रद्द कर नई सूची तैयार करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच 15 अक्टूबर को सुनवाई करेगी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दिया था. साथ ही अदालत ने सभी पक्षों से लिखित दलीलें जमा करने को कहा था.
हाईकोर्ट ने 3 महीने के भीतर दोबारा लिस्ट तैयार करने के आदेश दिया था. यह याचिका सामान्य वर्ग में चयनित अभ्यर्थी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी और हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर नई सूची बनाते समय यदि वर्तमान में कार्यरत किसी सहायक शिक्षक पर विपरीत असर पड़ता है तो मौजूदा सत्र का लाभ दिया जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद नई चयन सूची बनने से वीते चार सालों से सेवाएं दे रहे हजारों शिक्षक बाहर हो जाएंगे.
1 जून 2020 को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी किया था. बता दें कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब 1 लाख 37 हजार शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में समायोजित कर दिया था. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा था, जिसपर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को रद्द कर दिया था और योगी आदित्यनाथ की सरकार को 1 लाख 37 हजार पदों के लिए दोबारा परीक्षा का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पदों को दो चरणों में भरने को कहा था. जिसके बाद योगी सरकार ने वर्ष 2018 में 68500 पदों के लिए वैकेंसी निकाली. इसके बाद दूसरे चरण की भर्ती 69000 सहायक शिक्षक की भर्ती की गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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