देश

रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को दिल्ली के एमसीडी स्कूलों में दाखिला देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 2 सप्ताह बाद करेगा सुनवाई

रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को दिल्ली के एमसीडी स्कूलों में दाखिला देने की मांग वाली याचिका पर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा यह याचिका सिर्फ इन कमजोर बच्चों को शिक्षित करने के लिए है. जिसपर जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि ये रोहिंग्या परिवार कहां है? आप उन्हें शिविरों से बाहर निकालना चाहते है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा फिर उनके अभिभावकों को भी बाहर जाना होगा. जिसपर याचिकाकर्ता ने कहा कि वे शिविर में नहीं रह रहे हैं, वे सामान्य घरों में रह रहे हैं.

देश के शिक्षा के अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों के लिए है

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि वे नियमित आवासीय क्षेत्र में रह रहे हैं तो आपकी बात पर विचार करना आवश्यक होगा, अगर वे कैंप में कैद है, तब भी आपकी बात पर विचार करना जरूरी है. इससे पहले नीतिगत मामला बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि देश के शिक्षा के अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों के लिए है. म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों को आधार कार्ड न होने के कारण एमसीडी के स्कूलो में दाखिला देने से इनकार करने के बाद यह जनहित याचिका दायर की गई है. यह याचिका सोशल ज्यूरिस्ट नामक एक गैर सरकारी संगठन की ओर से दाखिल की गई है.
दाखिल याचिका में कहा गया है कि यह आचरण इन बच्चों के लिए शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-ए के साथ-साथ बच्चों के निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 द्वारा गारंटीकृत है. याचिका में कहा गया है कि एमसीडी स्कूल बच्चों को इस आधार पर प्रवेश देने से मना कर रहा है कि उनके पास आधार कार्ड, बैंक खाते और अन्य दस्तावेज नहीं हैं, सिवाय यूएनएचआरसी द्वारा जारी शरणार्थी कार्ड के. याची में कहा गया था, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जब तक ये बच्चे भारत में रहेंगे, वे भारत के संविधान और प्रासंगिक वैधानिक कानूनों द्वारा गारंटीकृत शिक्षा के मौलिक और मानवाधिकार के हकदार हैं.
इसलिए, इस अधिकार से वंचित करना उनके मौलिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है. याचिका में यह भी कहा गया है कि शिक्षा निदेशालय और दिल्ली नगर निगम की यह जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि 14 वर्ष से कम आयु के सभी छात्रों को श्री राम कॉलोनी, खजूरी चौक क्षेत्र में सरकारी या एमसीडी स्कूलों में दाखिला मिले, जहाँ ये बच्चे रहते हैं. याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि इन अधिकारियों को यह गारंटी देनी चाहिए कि उनके स्कूलों में नामांकित सभी छात्रों को वे वैधानिक लाभ मिलें जिनके वे हकदार हैं.
गोपाल कृष्ण

Recent Posts

ताहिर हुसैन की बढ़ेंगी मुश्किलें! दंगा भड़काने के मामले में कोर्ट ने सुनाई 2 साल की कैद और जुर्माना

दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व…

19 minutes ago

ब्लाइंड मर्डर का 3 दिन में खुलासा, लिव-इन पार्टनर ही निकली दिव्यांग शिक्षक की कातिल

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में दिव्यांग शिक्षक प्रमोद कुमार की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर…

1 hour ago

जनगणना नियमों में हुआ संशोधन, जानिए प्राइवेट स्कूलों के स्टाफ पर क्या पड़ेगा असर

केंद्र सरकार ने जनगणना नियम 1990 में संशोधन करते हुए प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को…

1 hour ago

दिल्ली को चमकाने की तैयारी! सीएम रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी, अवैध पोस्टरों पर होगी कार्रवाई

दीपावली से पहले दिल्ली को साफ और रोशन बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने…

2 hours ago

‘अपनी औकात में रहिए प्रशांत किशोर…’, PK को प्रीति शेखर इतना बुरा फटकारा?

Preeti Shekhar slams Prashant Kishor: प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर विवादित बयान…

2 hours ago

लुलु मॉल से खरीदी KitKat में जिंदा कीड़े, ऐसे केस में क्या हैं 4 सावधानियां?

Worms found in KitKat chocolate: हैदराबाद के लुलु मॉल से खरीदी KitKat चॉकलेट में जिंदा…

2 hours ago