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NEET Paper Leak CBI Investigation: देश की राजनीति और देश के युवाओं का भविष्य- ये दो ऐसी चीजें हैं जो इन दिनों हर आम हिंदुस्तानी की चाय की टेबल पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई हैं. एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल की सियासत में छापेमारी को लेकर हड़कंप मचा है, वहीं दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा ‘नीट’ (NEET) पेपर लीक मामले में सीबीआई (CBI) के एक्शन ने एक बार फिर अभिभावकों और छात्रों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. दोनों ही मामलों में जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई से सियासी और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है.
सबसे पहले बात करते हैं बंगाल की, जहां सत्ता के गलियारों में अचानक तब हलचल तेज हो गई जब पुलिस की एक बड़ी टीम ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक दफ्तर पर अचानक छापा मार दिया. इस छापेमारी ने हर किसी को हैरान कर दिया है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी के दफ्तर में इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई आम बात नहीं है.
जानकारी के अनुसार, इस तलाशी अभियान के दौरान पुलिस के हाथ कई बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण दस्तावेज लगे हैं. लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि पार्टी दफ्तर के भीतर से 100 से भी ज्यादा आधार कार्ड बरामद किए गए हैं. इसके साथ ही वहां जमीन की खरीद-फरोख्त (Land Dealing) से जुड़े कई अहम कागजात भी मिले हैं. अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि एक राजनीतिक दल के दफ्तर में इतनी बड़ी तादाद में आम लोगों के पहचान पत्र और जमीन के कागजात आखिर क्या कर रहे थे?
इधर बंगाल में पुलिस का एक्शन चल रहा था, उधर महाराष्ट्र के नांदेड़ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने नीट पेपर लीक मामले के तार खंगालने शुरू कर दिए. देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस रैकेट के मुख्य आरोपियों में से एक, शुभम खैरनार के दफ्तर पर सीबीआई ने जोरदार छापेमारी की है.
सीबीआई के हाथ लगे सुरागों के मुताबिक, जांच टीम नांदेड़ में रहने वाले एक खास परिवार के घर भी पहुंची. बंद कमरों में परिवार के सदस्यों से घंटों पूछताछ की गई. सूत्रों के हवाले से जो खबर छन कर सामने आ रही है, वो बेहद परेशान करने वाली है. बताया जा रहा है कि इस परिवार ने अपने बच्चे का डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए शार्टकट रास्ता चुना था और मोटी रकम यानी भारी-भरकम पैसे देकर नीट (NEET) का लीक पेपर खरीदा था.
ये दोनों ही खबरें हमारी सामाजिक और राजनीतिक लाइफस्टाइल पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती हैं. एक तरफ सरकारी दस्तावेजों और पहचान पत्रों का किसी राजनीतिक ठिकाने से मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, तो दूसरी तरफ मेडिकल जैसी पवित्र परीक्षा के पेपरों का खुलेआम बिकना हर उस ईमानदार छात्र का दिल तोड़ता है जो दिन-रात पढ़ाई में अपनी आंखें सुजाता है. फिलहाल दोनों ही मामलों में जांच एजेंसियां कड़ाई से जुटी हुई हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों से नकाब उतरना तय माना जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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