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लोकसभा में हंगामा: चुनाव सुधार बहस के दौरान राहुल गांधी को सभापति ने टोका, कहा- आप नेता प्रतिपक्ष हैं, यह गलत तरीका है

Electoral Reforms Discussion: संसद के शीतकालीन सत्र में आज मंगलावर (9 दिसंबर) को चुनाव सुधार पर चर्चा चल रही है. नेत विपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव सुधार पर हो रही डिबेट में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि खादी न सिर्फ एक वस्त्र है, यह भारत की आत्मा है. हर क्षेत्र की पहचान अलग-अलग कपड़ों के लिए है. राहुल गांधी ने असमिया गमछे से लेकर कांचीपुरम साड़ी तक की चर्चा की और कहा कि हमारा देश भी एक फैब्रिक की तरह है. देश की झलक देश का पहनावा है. देश के सारे धागे एक जैसे हैं. हमारा देश 150 करोड़ लोगों से बना है. देश के सारे धागे एक जैसे हैं.

लोकसभा में हंगामा

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति आरएसएस के हैं. इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को टोकते हुए कहा कि आप चुनाव सुधार पर ही बोलिए, किसी संगठन का नाम मत लीजिए. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम सभी लोग नेता प्रतिपक्ष को सुनने के लिए ही बैठे हैं. अगर वह विषय पर ही नहीं बोलेंगे, तो क्यों समय खराब कर रहे हैं सबका.

राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष के हंगामे पर कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है. शिक्षण संस्थाओं पर कब्जा किया गया है. वीसी की नियुक्ति योग्यता के आधार पर नहीं, एक संगठन से जुड़ाव के आधार पर की गई है. सीबीआई, ईडी पर भी एक संस्था से जुड़े लोगों ने कब्जा किया गया है. तीसरी संस्था चुनाव आयोग पर भी एक संस्था का कब्जा है, जो देश में चुनाव को कंट्रोल करती है. मेरे पास इसके सबूत हैं. बीजेपी लोकतंत्र को डैमेज करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है. सीजेआई को सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया गया.

उन्होंने आगे कहा कि, एक तरफ पीएम मोदी और अमित शाह बैठे थे और दूसरी तरफ मैं. किसी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया. दिसंबर 2023 में नियम बदल यह प्रावधान किया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को दंडित नहीं किया जा सकता. यह 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया. सीसीटीवी और डेटा को लेकर नियम बदले गए. सत्ता के साथ चुनाव आयोग का तालमेल है. यह डेटा का सवाल नहीं, चुनाव का सवाल है.

सरकार नहीं चाहती चुनाव सुधार- राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव सुधार जरूरी हैं. मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट सभी राजनीतिक दलों को चुनाव से एक महीने पहले दी जानी चाहिए. सीसीटीवी फुटेज डिस्ट्रॉय करने का नियम भी बदला जाना चाहिए. वोट चोरी एंटी नेशनल काम है. हम महान लोकतंत्र हैं. सरकार चुनाव सुधार नहीं चाहती.


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-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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