पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक ऐसा (West Bengal UCC Bill) भूचाल आ गया है, जिसकी कल्पना शायद कुछ समय पहले तक किसी ने नहीं की थी. बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव होने के बाद अब शुभेंदु सरकार राज्य को पूरी तरह से बदलने के मूड में आ गई है. बंगाल विधानसभा में आज एक-दो नहीं बल्कि पूरे पांच ऐतिहासिक विधेयक पेश होने जा रहे हैं, जो राज्य की पूरी कानूनी व्यवस्था को बदलकर रख देंगे.
इस बड़े फैसले के तहत बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ‘योगी मॉडल’ को बंगाल में उतारने का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है, जिससे अपराधियों में हड़कंप मच गया है.
पश्चिम बंगाल की विधानसभा आज एक बहुत बड़े ऐतिहासिक फैसले की गवाह बनने जा रही है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार आज सदन के पटल पर पांच बेहद महत्वपूर्ण विधेयक रखने वाली है. इन विधेयकों में सबसे बड़ा और चर्चा का विषय बना हुआ है समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी विधेयक. सरकार का दावा है कि इन नए कानूनों के आने के बाद बंगाल में सालों से चली आ रही तुष्टिकरण की राजनीति पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा और राज्य में कानून का राज स्थापित होगा.
बंगाल में लंबे समय से हो रहे संगठित अपराधों और हिंसा को रोकने के लिए सरकार ने अब उत्तर प्रदेश का रास्ता चुना है. आज विधानसभा में जो विधेयक पेश हो रहे हैं, उनमें से एक पूरी तरह ‘योगी मॉडल’ पर आधारित है. इस नए कानून के तहत राज्य में संगठित अपराध करने वाले माफियाओं और अपराधियों पर सीधे नकेल कसी जाएगी.
इस कानून (West Bengal UCC Bill) के पास होते ही पुलिस और प्रशासन को अपराधियों की अवैध संपत्तियों को तुरंत जब्त करने और उन्हें कुर्क करने का सीधा अधिकार मिल जाएगा. इसके अलावा सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी एक कड़क विधेयक लाया जा रहा है.
अगर आज विधानसभा में यह विधेयक पास हो जाता है, तो देश के नक्शे पर पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता लागू करने वाला एक प्रमुख राज्य बन जाएगा. इससे पहले देश के कुछ अन्य राज्यों ने भी इसे अपने यहाँ लागू किया है. उत्तराखंड ने जनवरी 2025 में इसे सबसे पहले लागू किया था. इसके बाद मार्च 2026 में गुजरात और फिर मई 2026 में असम ने यूसीसी को अपने राज्य में लागू करके इतिहास रचा था. अब इसी कतार में पश्चिम बंगाल का नाम भी जुड़ने जा रहा है.
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सभी के लिए एक कानून: राज्य में रहने वाले हर धर्म और जाति के नागरिकों के लिए एक जैसा कानून हो जाएगा.
शादी और तलाक के नियम: विवाह के नियम सभी के लिए बिल्कुल समान होंगे और तलाक की प्रक्रिया भी एक जैसी हो जाएगी.
संपत्ति और गोद लेना: संपत्ति के उत्तराधिकार के नियम सबके लिए एक समान होंगे. साथ ही बच्चा गोद लेने और भरण-पोषण के नियम भी सभी पर समान रूप से लागू होंगे.
पर्सनल लॉ का खात्मा: इस कानून के आते ही सभी धर्मों के अपने अलग पर्सनल लॉ पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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