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West Bengal UCC: सुवेंदु सरकार का बड़ा कदम, समान नागरिक संहिता के लिए 9 सदस्यीय कमेटी गठित, अगस्त में आ सकता है बिल

West Bengal UCC: पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026’ के ड्राफ्ट की समीक्षा और अध्ययन के लिए नौ सदस्यों वाली एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है.

राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कमेटी के सभी सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी गई है. इस समिति का काम प्रस्तावित कानून के हर पहलू का अध्ययन करना, जरूरी सुझाव देना और अंतिम बिल का मसौदा तैयार करने में सरकार की मदद करना होगा.

कौन-कौन हैं कमेटी में शामिल?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को जगह दी गई है. सदस्यों में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल के रेजिडेंट कमिश्नर दुष्यंत नारियाला, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और पश्चिम बंगाल की होम सेक्रेटरी संघमित्रा घोष शामिल हैं.

इसके अलावा एंथ्रोपोलॉजी की रिटायर्ड प्रोफेसर रत्ना भट्टाचार्य, गौर बंगा यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर गोपाल चंद्र मिश्रा, कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील उस्मान गनी मल्लिक और बंगाल संभाग के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर निर्मल्य भट्टाचार्य भी कमेटी का हिस्सा होंगे.

अगस्त में विधानसभा में पेश हो सकता है बिल

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता वाली पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने 2 जुलाई को UCC बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी. सरकार का कहना है कि कमेटी से सुझाव मिलने के बाद बिल के अंतिम प्रारूप को तैयार किया जाएगा और इसे अगस्त में राज्य विधानसभा के सामने पेश किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कानून में राज्य के आदिवासी, मूल निवासी, कुर्मी और अन्य मान्यता प्राप्त प्राचीन आदिवासी समुदायों को शामिल नहीं किया जाएगा. सरकार ने यह फैसला उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए UCC मॉडल को ध्यान में रखते हुए लिया है.

क्या है UCC का उद्देश्य?

राज्य सरकार के मुताबिक, यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू करना है. इसके तहत शादी, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों से जुड़े नियमों को एक समान बनाने की कोशिश की जाएगी.

अगर पश्चिम बंगाल में UCC लागू होता है, तो यह गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा.

पश्चिम बंगाल में UCC लागू करना भारतीय जनता पार्टी के विधानसभा चुनावी घोषणापत्र का एक प्रमुख मुद्दा रहा था. चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कई रैलियों में राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की जरूरत पर जोर दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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