टीडीएस प्रणाली को खत्म करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 24 जनवरी को सुनवाई करेगा. यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने वकील अश्विनी दुबे की माध्यम से दायर की है. याचिका में केंद्र सरकार, विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधि आयोग और नीति आयोग को पक्ष बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि टीडीएस प्रणाली स्पष्ट रूप से मनमानी, तर्कहीन और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (पेशा करने का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के विरुद्ध घोषित किया जाए.
याचिकाकर्ता के मुताबिक टीडीएस प्रणाली से करदाता पर असंगत रूप से महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यय का बोझ बढ़ता है. याचिका में नीति आयोग को याचिका में उठाये गए मुद्दों पर विचार करने तथा टीडीएस प्रणाली में आवश्यक बदलाव का सुझाव देने के निर्देश देने की मांग की गई है. इसमें कहा गया है कि विधि आयोग को टीडीएस प्रणाली की वैधानिकता की जांच करनी चाहिए और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए.
आयकर अधिनियम के तहत टीडीएस ढांचे में भुगतानकर्ता द्वारा भुगतान के समय कर की कटौती और आयकर विभाग के पास जमा करना अनिवार्य है. इन भुगतानों में वेतन, संविदा शुल्क, किराया, कमीशन और अन्य कर योग्य राशियां शामिल है. कटौती की गई राशि को भुगतानकर्ता की एक देयता के विरुद्ध समायोजित किया जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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