लीगल

अदालतों में एआई का कितना इस्तेमाल? CJI सूर्यकांत ने तय की सीमा, बताया न्याय का भविष्य

Technology in Judiciary: सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के व्याख्यान ‘The Future of Justice Delivery: Innovation, Inclusion and Integrity’ के दौरान न्याय वितरण प्रणाली के भविष्य पर चर्चा करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य न्यायाधीश की जगह लेना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है. न्यायपालिका में नवाचार तभी सार्थक है, जब वह समावेशिता और ईमानदारी के मूल्यों के साथ जुड़ा हो.

क्या है मामला?

कार्यक्रम में भारतीय न्यायपालिका की डिजिटल यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में अदालतों ने तकनीक को अपनाकर न्याय प्रक्रिया को आसान बनाया है. पहले जहां वकीलों को कोर्ट की कार्यवाही और कॉज लिस्ट जानने के लिए अदालत परिसर में दौड़ना पड़ता था, वहीं अब मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही सेकंड में किसी भी अदालत की कॉज लिस्ट और चल रही सुनवाई की जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि,

ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के तहत ई-फाइलिंग, डिजिटल केस मैनेजमेंट, ऑनलाइन रिकॉर्ड, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाएं न्यायिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं. इससे न्यायाधीशों का प्रशासनिक बोझ कम हुआ है, वकीलों को डिजिटल लाइब्रेरी और कानूनी शोध संसाधनों तक आसान पहुंच मिली है और दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले वादकारियों के लिए भी अदालत तक पहुंच आसान हुई है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एआई न्यायिक बुद्धिमत्ता को मजबूत कर सकता है, लेकिन वह न्यायिक विवेक, संवेदनशीलता और मानवीय निर्णय का स्थान नहीं ले सकता. तकनीक सूचना को तेजी से संसाधित कर सकती है, लेकिन न्याय के लिए मानवीय समझ और विवेक आवश्यक है. सुप्रीम कोर्ट की एआई आधारित पहलों का भी उल्लेख किया गया.

सीजेआई ने कहा कि,

SUVAS सॉफ्टवेयर न्यायिक फैसलों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में मदद करता है, जबकि Su Sahay चैटबॉट अदालत की प्रक्रिया, फाइलिंग और केस की स्थिति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है. इसके अलावा One Case, One Data पहल के माध्यम से प्रत्येक मामले का एक मानकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. सीजेआई यह भी स्पष्ट किया गया कि एआई का उपयोग पूरी तरह मानव निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही के तहत होना चाहिए.

एआई प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में एआई के उपयोग के लिए मसौदा विनियम (Draft Regulations) भी तैयार किए हैं, जिनमें साफ कहा गया है कि एआई प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता है, लेकिन साक्ष्यों का मूल्यांकन, न्यायिक विवेक का प्रयोग और संवैधानिक न्याय देना केवल न्यायाधीश ही कर सकते हैं. स्कोरा द्वारा आयोजित कार्यक्रम के समापन पर सीजेआई सूर्यकांत ने कि भारत का अनुभव बताता है कि तकनीक और मानवीय मूल्य एक-दूसरे के पूरक हैं. यदि तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग किया जाए तो यह न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, पारदर्शी, प्रभावी और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

यह भी पढ़ें-सुपारी तस्करी का नेटवर्क ध्वस्त! ईडी की असम और दिल्ली में छापेमारी, बेनामी खातों और ब्लैंक चेक से खुला राज

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

कटरीना के बढ़े वजन पर ट्रोलिंग, सौंदर्या ने लगाई लताड़; सलमान भी साथ

Katrina Kaif Trolling After Pregnancy: कटरीना कैफ के मां बनने के बाद वजन को लेकर…

39 minutes ago

‘जरूरत से ज्यादा दया ठीक नहीं…’, जघन्य अपराधों में नरमी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की सजा में छूट को लेकर सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस…

40 minutes ago

20 साल में 8,778 मौतें, करीब 9% विमान हादसों में पायलट की भूमिका पर उठे सवाल

हवाई यात्रा पहले से ज्यादा सुरक्षित हुई है लेकिन अब पायलट की जानबूझकर की गई…

47 minutes ago

क्या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में उतरे अवैध बंग्लादेशी? जानें क्या है वायरल वीडियो का सच

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि मुंबई…

1 hour ago

श्रावस्ती में शटडाउन के बावजूद हाईटेंशन लाइन में आया करंट, 2 ग्रामीणों की मौत

श्रावस्ती में शटडाउन के बावजूद 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन चालू होने से दो…

2 hours ago