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इंडो-यूके कमर्शियल डिस्प्यूट्स के चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान CJI सूर्यकांत ने मध्यस्थता को लेकर चिंता व्यक्त किया

सीजेआई सूर्यकांत ने लंदन में इंडियन काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन द्वारा आयोजित इंडो-यूके कमर्शियल डिस्प्यूट्स के चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए आगाह किया कि मध्यस्थता में भी अब पारंपरिक अदालती मुकदमों जैसी कमियां आ रही है. उन्होंने कहा कि विवाद सुलझाने के लिए शुरू किए गए वैकल्पिक तरीका आर्बिट्रेशन भी अब उन्हीं कमियों का शिकार हो रहे है, जिन्हें दूर करने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आर्बिट्रेशन को न्याय का जरिया बने रहना चाहिए. कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों से सीजेआई सूर्यकांत से भारत मे कथित तौर पर असहमति को दबाए जाने को लेकर सवाल पूछने की कोशिश कर रहे थे. सीजेआई ने कहा कि आर्बिट्रेशन को औपचारिक मुकदमों की कमियों के समाधान के तौर पर बनाया गया था, लेकिन अब इसमें भी वहीं कमियां आ रही है. उन्होंने कहा कि मध्यस्थता अब औपचारिक मुकदमेबाजी की कमियां को अपना रही है.

विवाद निपटारे का विकल्प अब खुद बन रहा है समस्या

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विवाद समाधान तंत्र अब उन्हीं खामियों को अपना रहा है, जिन्हें दूर करने के लिए इसे मूल रूप से बनाया गया था. दूसरे शब्दों में जिस उपचार को ठीक करने के लिए इसे बनाया गया था, वह अब उसी बीमारी जैसा बन गया है. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की स्थिति का स्पष्ट आकलन करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह प्रणाली कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है. जिनमें बढ़ती लागत, देरी, कुछ ही वकीलों के बीच नियुक्तियों का केंद्रीकरण और प्रक्रियात्मक जटिलता में वृद्धि शामिल है.

सीजेआई के मुताबिक मध्यस्थता को एक परिष्कृत तंत्र के बजाए एक प्रचारित उत्पाद के रूप में देखा जाने लगा है, जिससे पक्षकारों और व्यवसायों से ध्यान हटकर मध्यस्थता के इर्द-गिर्द विकसित हुए उद्योग पर केंद्रित हो गया है. सीजेआई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ने कुछ मामलों में मुकदमेबाजी की उन आदतों को ही आत्मसात कर लिया जिनसे बचने का इसका उद्देश्य था, जिनमें विस्तृत दलीलें, कई प्रक्रियात्मक दौर, लंबी सुनवाई और महंगी शुल्क संरचनाएं शामिल हैं.

सीजेआई सूर्यकांत ने तेजी से जटिल होते जा रहे मध्यस्थता खंडों पर भी चिंता व्यक्त की, जो अक्सर विवाद के गुण-दोषों पर विचार करने से पहले ही मध्यस्थता समझौतो की वैधता, लागू कानून, मध्यस्थता स्थल और क्षेत्राधिकार जैसे प्रारंभिक प्रश्नों पर मुकदमेबाजी को जन्म देते हैं.

पार्टी स्वायत्तता की व्यापक व्याख्या पर सवाल उठाते हुए सीजेआई ने कहा कि इस सिद्धांत को किसी पार्टी के पक्ष में निर्णय देने वाले न्यायाधीशों को चुनने के असीमित अधिकार के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि, उन्होंने कहा, पार्टी स्वायत्तता एक ऐसी प्रक्रिया की गारंटी देती है जो स्वतंत्र, निष्पक्ष और न्यायसंगत हो.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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