CJI Suryakant: सीजेआई सूर्यकांत ने रूस में आयोजित 14वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल लीगल फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ और ग्लोबल ईस्ट के कई विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असमान रूप से जांच और दबाव का सामना करना पड़ता है, जबकि समृद्ध और प्रभावशाली देशों के मानवाधिकार रिकॉड भी हमेशा बेदाग नहीं होते.
उन्होंने कहा कि कई देश अब भी उपनिवेशवाद की विरासत, गरीबी और संस्थागत चुनौतियों से जूझ रहे हैं, इसलिए उनके हालात को समझे बिना उन पर समान मानकों से निर्णय करना उचित नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों और संस्थाओं की सफलता तभी संभव है जब वे समान न्याय और समान कानून के सिद्धांतों पर आधारित हो. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ‘,समान न्याय’ और ‘समान कानून’ केवल औपचारिक शब्द नही हैं, बल्कि किसी भी कानूनी व्यवस्था की विश्वसनीयता की बुनियाद हैं.
उन्होंने कहा कि कानून तक समान पहुच ही वास्तविक समानता की पहली सीढ़ी है. केवल कानूनी अधिकार देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि आम लोगों को उन अधिकारों का वास्तविक लाभ मिले. उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता, गरिमापूर्ण जीवन और न्याय का अधिकार देता है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन अधिकारों को भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और भाषाई बाधाओं के पार लोगों तक पहुचाना रही है.
सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने समय-समय पर जनहित याचिकाओं को स्वीकार करने, मुफ्त कानूनी सहायता को मजबूत करने और प्रक्रियात्मक नियमों को न्याय के अधीन रखने जैसे कदम उठाकर न्याय तक पहुच को आसान बनाया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कानून के समक्ष समानता का विचार केवल पश्चिमी परंपरा तक सीमित नहीं है. उन्होंने रोमन, इस्लामी और अफ्रीकी न्याय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि विभिन्न सभ्यताओं ने अलग-अलग तरीकों से समानता के इसी मूल सिद्धांत को स्वीकार किया है. इससे पहले न्यायिक क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश और रूस के मुख्य न्यायाधीश ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए. भारत की ओर से सीजेआई सूर्यकांत और रुस जी ओर से प्रधान न्यायाधीश इगोर क्रास्नोव ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
सुप्रीम कोर्ट के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सीजेआई सूर्यकांत ने रूसी प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात की. एक बयान के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के ऐतिहासिक और सामयिक रिश्तों पर जोर देते हुए शुरू हुई. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल न्याय व्यवस्था और कानूनी नवाचारों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है. इस पहल को दोनों देशों के बीच बढ़ते संस्थागत संबंधों और न्यायिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
इसमें कहा गया है कि इसके बाद बातचीत दोनों देशों की न्यायिक संस्थाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर केंद्रीत रही, जो संप्रभु समानता के सिद्धांत और अन्य मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं पर आधारित होंगे. जिनके दोनों देश पक्षकार है. सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वन केस, वन डेटा’ पहल का भी जिक्र किया, जिसका मकसद सभी न्यायिक प्लेटफार्म पर हर केस के लिए स्टैंडर्ड डिजिटल रिकॉर्ड बनाना है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मध्यस्थता और सुलह को बढ़ावा देने के लिए भी तकनीक का तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कार्यक्षमता में सुधार, लागत में कमी और समय पर विवादों के समाधान में मदद मिल रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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