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एडवोकेट एक्ट 1961 में संशोधन के खिलाफ वकीलों का देशव्यापी विरोध, पढ़ें क्या है पूरा मामला

1961 के एडवोकेट एक्ट में बदलाव करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ देशभर के वकील विरोध कर रहे है. दिल्ली के निचली अदालतों के वकील की मांग है कि जब तक सरकार इस बिल को वापस नही लेती है तब तक यह हड़ताल जारी रहेगा. यह विरोध दिल्ली से शुरू होकर लगभग 14 राज्यों में फैल गया है. वही बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और बीजेपी से राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा ने केंद्र सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की है.

जबकि नई दिल्ली बार एसोसिएशन के एक्टिंग सचिव वो एन शर्मा ने कहा कि भारत सरकार की नीति शुरू से ही दमनकारी रही है. जो लोग दूसरे के अधिकार की लड़ाई लड़ते है उनके अधिकार को भी छीन लिया गया है. सरकार प्रयास कर रही है कि वकीलो की एकता को खत्म किया जाए.

वकीलों के अधिकारों पर हमला

सरकार वकीलों के खिलाफ मुहिम छेड़ रही है. हम प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से बिल को वापस लेने की मांग कर रहे है. उन्होंने कहा कि सरकार वकीलो की भलाई के लिए काम करे. वही नई दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्य और सचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे विक्रम चौहान ने विरोध करते हुए कहा कि वकील सरकार बना सकते है तो सरकार गिरा भी सकते है. उन्होंने कहा कि इसको लेकर सड़क से संसद तक कोहराम मचेगा.

बता दें कि नए बिल की धारा 35A वकील या वकीलों के संगठन को कोर्ट का बहिष्कार करने, हड़ताल करने या वर्क सस्पेंड करने से रोकती है. इसका उल्लंघन वकालत पेशे के मिसकंडक्ट माना जाएगा और इसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसमें यह भी कहा गया है कि प्रोफेशनल मिसकंडक्ट की वजह से किसी का नुकसान होता है तो बिल की धारा 45B के तहत प्रोफेशनल मिसकंडक्ट के कारण वकील के खिलाफ कार्रवाई के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया में शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी.

हड़ताल तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई का नोटिस

नए बिल में कानूनी व्यवसायी की धारा 2 की परिभाषा व्यापक बनेगी. इसमें कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस के साथ ही कॉरपोरेट वकील, इन-हाउस परामर्शदाताओं, वैधानिक निकायों और विदेशी कानूनी फर्मो में कानूनी काम में लगे लोगों को भी कानूनी व्यवसायी माना जाएगा. एडवोकेट एक्ट 1961 की धारा 4 में संशोधन बकम प्रस्ताव है. इससे केंद्र को बीसीआई में निर्वाचित सदस्यों के साथ 3 सदस्यों को नामित करने का अधिकार मिल जाएगा. इससे केंद्र कानून के प्रावधानों को लागू करने में बीसीआई को निर्देश दे सकेगी. इस नई बिल में एक नई धारा 33A जोड़ी गई है. इसके मुताबिक अदालतों, ट्रिब्यूनल और अन्य प्राधिकरणों में वकालत करने वाले सभी वकीलों को उस बार एसोसिएशन में पंजीकरण कराना होगा, जहां पर वे वकालत की प्रैक्टिस करते है.

दूसरी ओर हड़ताल के बावजूद निचली अदालतों के कुछ वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालतों में अपनी हाजिरी लगा रहे है. इसको लेकर निचली अदालतों के बार एसोसिएशन ने एक सख्त नोटिस जारी किया है. एसोसिएशन ने हिदायत दी है कि कोर्ट परिसर में कोई टाइपिंग, फोटोस्टेट और वीसी के जरिए हाजिरी किसी भी मामले में दर्ज नही कराई जाएगी. नोटिस में यह भी कहा गया है कि जो वकील इसका पालन नही करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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