दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेत्री सेलिना जेटली की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार को नए हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दे दिया है. कोर्ट 3 फरवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने हिरासत में लिए गए सेलिना जेटली के भाई मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत कुमार जेटली को कानूनी सहायता के विकल्प से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय वकील रखने का खर्च बंदी या उसके परिवार को वहन करना होगा.
कोर्ट ने कहा कि यदि कोई वकील या लॉ फर्म निशुल्क सहायता देना चाहे तो उसकी भी जानकारी मुहैया कराई जाए. पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील निधि रमन ने कोर्ट को बताया था कि दुबई जेल में बंद मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत कुमार जेटली कांसुलर एक्सेस की सुविधा मुहैया करा दी गई है. इसपर कोर्ट ने पूछा था कि क्या याचिकाकर्ता अपने भाई से संपर्क स्थापित कर पाई है? याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि अभी तक भाई से संपर्क स्थापित नही हो पाया है. दायर याचिका में उन्होंने अपने भाई मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत कुमार जेटली की संयुक्त अरब अमीरात में कथित हिरासत को लेकर याचिका दायर की है.
सेलिना जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत के समक्ष यह मांग रखी है कि विदेश मंत्रालय की यह संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है कि वह विदेशों में हिरासत में रखे गए भारतीय नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करें. उन्होंने दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि विक्रांत जेटली को तत्काल प्रभावी कानूनी सहायता मुहैया कराई जाए. एमईए द्वारा विधिक खर्चो के लिए आर्थिक सहायता या सहयोग दिया जाए. सेलिना जेटली को अपने भाई.से सीधा और वास्तविक समय में.संवाद करने की सुविधा दी जाए. जेटली ने दायर याचिका में यह भी कहा है कि चिकित्सकीय उपचार और मानवीय देखभाल के लिए त्वरित राजनयिक कदम उठाए जाएं.
भारतीय दूतावास द्वारा नियमित कांसुलर निगरानी और पारिवारिक अपडेट सुनिश्चित किए जाए. यूएई अधिकारियों के.साथ समन्वय कर अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना कन्वेंशन ऑफ कांसुलर रिलेशंस के तहत उनके अधिकारों की रक्षा की जाए. दायर याचिका में कहा गया है कि सितंबर 2024 से अब तक परिवार ने भारतीय दूतावास, कांसुलेट और विदेश मंत्री को कई बार निवेदन भेजे हैं, लेकिन मेजर जेटली की स्थिति या कानूनी प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है.
सेलिना जेटली के आरोप है कि सरकार की निष्क्रियता संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उनके भाई के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और भारत का अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका संवैधानिक दायित्व है.
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-भारत एक्सप्रेस
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