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Delhi High Court news

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेत्री सेलिना जेटली की याचिका पर केंद्र सरकार को नया हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है. मामला दुबई जेल में बंद उनके भाई विक्रांत जेटली से जुड़ा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कमाने की क्षमता और वास्तविक आय दो अलग-अलग विषय हैं. कोर्ट ने बीटेक और एमबीए डिग्रीधारी पत्नी को भरण-पोषण देने के पारिवारिक अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को सेना की जानकारी देने के आरोपी मोसिन खान की जमानत याचिका खारिज की. कोर्ट ने कहा कि यह अपराध देश की अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा को न्यूजलॉन्ड्री की नौ महिला पत्रकारों के खिलाफ किए गए आपत्तिजनक पोस्ट 5 घंटे में हटाने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा- सभ्य समाज में ऐसी भाषा स्वीकार्य नहीं.

दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के चुनाव कराने के लिए निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति की मांग वाली याचिका पर भारतीय मुक्कबाजी महासंघ और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की आपराधिक मानहानि मामले में अपील पर शिकायतकर्ता तेजिंदर बग्गा को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी.

अमनदीप सिंह ढल ने CBI की चार्जशीट और समन के आदेश को चुनौती दी है. हालांकि, अमनदीप सिंह ढल की ओर से दायर याचिका का सीबीआई ने विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई और ढल को संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा है.

एसोसिएशन दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से उनकी नर्सरी को उखाड़ने और बुल्डोजर से सभी पौधों को तोड़ने के खिलफ याचिका दाखिल की थी. उसने कहा था कि डीडीए उसे अपना पक्ष रखने का कोई अवसर दिए बिना वर्ष 2019 में अभियान चलाया था, जो उचित नही है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने अंकुश जैन को जमानत देते हुए कई शर्ते लगाई थी, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि वो कोर्ट के बिना अनुमति के दिल्ली एनसीआर से बाहर जाने पर रोक लगा दिया था.

एमसीडी की स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका का निपटारा कर दिया. अदालत ने कहा कि उपरोक्त के मद्देनजर अदालत संतुष्ट है कि आगे कोई निर्देश पारित करने की आवश्यकता नहीं है.