लीगल

कन्हैया लाल दर्जी हत्याकांड पर आधारित फिल्म उदयपुर फाइल्स को रिलीज पर रोक लगाने से दिल्ली हाई कोर्ट ने किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट से कन्हैया लाल दर्जी हत्याकांड पर आधारित फिल्म उदयपुर फाइल्स को रिलीज करने की हरी झंडी मिल गई है. दिल्ली हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. दायर याचिका में फिल्म उदयपुर फाइल्स के सर्टिसिकेशन को मंजूरी देने वाले एमआईबी के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी. मामले में आरोपी मोहम्मद जावेद ने यह याचिका दायर किया था.

सेंसर बोर्ड और मंत्रालय ने दी मंजूरी

मामले की सुनवाई के दौरान सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिसिकेशन की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ मेनका गुरुस्वामी ने दलीलें रखी थी. जबकि फिल्म निर्माताओं को लेकर भी वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने पक्ष रखा था. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने कहा था कि निष्पक्ष सुनवाई का मेरा अधिकार प्रभावित होगा. जबकि इस हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा था कि एक रिपोर्ट है. कृपया मोहम्मद जावेद के वकीलों की दलील देखे. उन्होंने यह भी कहा था कि यह ऐसा मामला नही है, जहां न्यायिक मामले की सुनवाई के दौरान फिल्म रिलीज हो. एकमात्र अपवाद यह है कि अभियुक्त फिल्म में भाग लेता है.

एएसजी चेतन शर्मा ने कहा था कि जिस व्यक्ति ने हस्ताक्षर किए हैं, वह सक्षम प्राधिकारी है. इसे कैबिनेट मंत्री, दो संयुक्त सचिवों और अन्य अधिकारियों ने देखा है. वही याचिकाकर्ता के वकील गुरुस्वामी ने कहा कि मैं माननीय सदस्यों से अनुरोध करती हूं कि वे फिल्म देखे. देखे कि क्या यह निष्पक्ष सुनवाई का उल्लंघन करती है या नहीं.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता  सर्वोपरि

उन्होंने कहा था कि देश में ऐसी कोई अदालत नही है जहां अभियुक्त ने यह तर्क दिया हो कि फिल्म निष्पक्ष सुनवाई का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा था कि अभिव्यक्ति और भाषण पर बहस हमेशा अनुच्छेद 21 के पक्ष में रही है. फिल्म का नाम भी कन्हैया लाल हत्याकांड की कहानी है. एएसजी शर्मा ने कहा था कि इसमें केवल इस पहलू पर गलती थी कि अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल धारा 6 के अनुरूप नहीं है. पुनरीक्षण एक सीमित अधिकार क्षेत्र है. अधिकारियों ने पूरी ताकत से अपना दिमाग लगाया है. कोई अतिरिक्त तथ्य या तर्क नहीं. हमें सीबीएफसी की बात माननी होगी.

मैंने एक के बाद एक कई मामले बताए हैं, और इस मामले में भी मैंने फैसले में अंतर किया है. इसपर कोर्ट ने एएसजी जी कहा था कि क्या आप फैसले को दिखा सकते है? एएसजी ने कहा कि मैं सहमत हूँ कि पुनरीक्षण प्राधिकरण सिनेमेटोग्राफी अधिनियम की धारा 6 (2) से आगे नहीं जा सकता था. सीमित आधार पर अपना आदेश वापस ले लिया. उच्च स्तर पर इसपर विचार हो चुका है. इसके अलावे कोई अतिरिक्त तथ्य या तर्क नही है. जबकि निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा था कि आरोपी का नाम नहीं बताया गया है.
उन्होंने फिल्म “केरल स्टोरी” का उदाहरण देते हुए कहा था कि फिल्म कर प्रदर्शन के आदेश दिए गए हैं. यह अपराध पर आधारित एक फिल्म है, इसका सटीक वर्णन नही है. इसमें समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है. इसमें किसी की निंदा नही की गई है.

ये भी पढ़े: कपिल शर्मा के लिए कनाडा बना खतरा! कैफे पर दोबारा हुई फायरिंग, गैंगस्टर ने ली जिम्मेदारी

भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

आखिर क्यों हादसों का हाईवे माना जाता है यमुना एक्सप्रसवे?

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है. ग्रेटर नोएडा में बस आग…

16 minutes ago

क्या है बीजेपी की नई यूपी रणनीति? लखनऊ से लेकर बूथ तक ऐसे बिछ रहा है चुनावी जाल

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने लखनऊ में अपनी संगठनात्मक तैयारियां…

20 minutes ago

दागी नेताओं पर आजीवन चुनाव बैन की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट दागी जनप्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव बैन और लंबित आपराधिक केसों के जल्द निपटारे…

21 minutes ago

हिंदुत्व, जाति और विकास; जानिए यूपी की सियासत में कैसे बदला बीजेपी का फॉर्मूला?

कल्याण सिंह से योगी आदित्यनाथ तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का सफर सिर्फ दो मुख्यमंत्रियों…

29 minutes ago

सर्विस रिवॉल्वर से चली गोली या साजिश? चंडीगढ़ पुलिस हेड कांस्टेबल नितिन का खून से लथपथ मिला शव

चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में पुलिस हेड कांस्टेबल नितिन की सिर में गोली लगने से मौत…

38 minutes ago