दिल्ली के सत्य निकेतन भवन ढहने की दुर्घटना से जुड़ी जनहित याचिका में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को पक्षकार (Party) बनाए जाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस मामले में केंद्र सरकार ने किरण बेदी को पक्षकार बनाए जाने की मांग का विरोध किया है. मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस ककरिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. अदालत ने केंद्र सरकार को इस पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है.
सुनवाई के दौरान एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि वह किरण बेदी का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि वह इस मामले में किसी न्यायिक निर्णय के आने से पहले ही अपनी तरफ से निष्कर्ष पर पहुंच रही हैं. एएएसजी ने स्पष्ट किया कि वे बेदी की ओर से पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर अपनी आपत्ति दर्ज करते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे.
दूसरी ओर, अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट के समक्ष विचाराधीन यह मामला व्यापक जनहित (Public Interest) से जुड़ा हुआ है. बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि अदालत एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर किरण बेदी के लंबे प्रशासनिक अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ उठा सकती है.
हाल ही में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक ऑनलाइन प्रार्थना पत्र (पत्र) लिखा है, जिसमें उन्होंने कई बड़े प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाने की मांग की है:
संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग: बेदी ने अपने पत्र के जरिए दिल्ली के मौजूदा व पूर्व विधायकों, पार्षदों (Councillors) और एमसीडी (MCD) अधिकारियों से उनकी तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज सभी संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक किए जाने का निर्देश देने की मांग की है. उनके मुताबिक, इनमें से कई संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर गंभीर संदेह पैदा होता है.
सोशल मीडिया पोस्ट और पीएमओ-गृह मंत्रालय को टैग: किरण बेदी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय गृह मंत्रालय को टैग करते हुए लिखा है कि दिल्ली में कई ऐसी संपत्तियां हैं जिन्हें कानून और नियमों का खुला उल्लंघन करके हासिल किया गया है या संचालित किया जा रहा है. उन्होंने अवैध निर्माण से लेकर उनमें व्यावसायिक गतिविधियां चलाने तक के मामलों का हवाला दिया है.
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर निशाना: बेदी का कहना है कि यह पूरी स्थिति वर्षों से चले आ रहे भाई-भतीजावाद (Nepotism) और प्रशासनिक संस्कृति के कारण पैदा हुई है, जिससे गंभीर सुरक्षा और कानूनी चिंताएं खड़ी हो रही हैं.
इससे पहले भी किरण बेदी ने राष्ट्रीय राजधानी में लगातार हो रही ऐसी दुर्घटनाओं और अवैध निर्माणों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि इस तरह की घटनाओं का मुख्य कारण बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सही प्रबंधन (Proper Management) का अभाव है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि यदि किसी के घर के दरवाजे पर रेत या सीमेंट की एक बोरी भी रख दी जाए, तो एमसीडी अधिकारियों को अवैध वसूली (Extortion) का नया मौका मिल जाता है.
बेदी ने चेताया था कि शहर में अनधिकृत और अवैध कॉलोनियों की संख्या बहुत अधिक है, और कमजोर इमारतें किसी भी प्राकृतिक आपदा या भूकंप की स्थिति में ‘ताश के पत्तों’ की तरह ढह सकती हैं. उन्होंने कहा था कि दिल्ली का अधिकांश विस्तार भ्रष्टाचार और अनाधिकृत निर्माण के जरिए हो रहा है, क्योंकि निहित स्वार्थ (Vested Interests) कानूनी और योजनाबद्ध रियल एस्टेट विकास को आगे नहीं बढ़ने देते.
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