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फिल्म अभिनेता राजपाल यादव की अर्जी खारिज, कोर्ट ने आज ही सरेंडर करने का दिया आदेश

फिल्म अभिनेता राजपाल यादव की परेशानी कम होने का नाम नही ले रहा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सरेंडर की अवधि को बढ़ाने की मांग की थी. जस्टिस स्वर्णकांता ने याचिका को खारिज करते हुए आज ही सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि आपने कहा था कि आप बॉम्बे में है, इसलिए आपको सरेंडर करने के लिए दो दिन का समय दिया था. लेकिन अब कोई आपके पास आधार नही है.

कोर्ट ने कहा कि नरमी दिखाने का कोई कारण नही है. मामले की.सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से पेश वकील ने कहा कि अगर एक हफ्ते की मोहलत मिल जाए तो वह पैसे का भुगतान कर देगा. उसने 50 लाख रुपए का इंतजाम कर लिया है. उसने मुझे सबूत भी दे दिए हैं. वो कल पैसे लेकर आएगा. लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. एक दिन पहले ही कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर करने का आदेश दिया था. साथ ही कोर्ट ने अंडरटेकिंग को बार-बार तोड़ने पर फटकार भी लगाई थी.

कोर्ट ने राजपाल यादव पर जताई नाराजगी

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि एक्टर का व्यवहार निंदनीय है और कई मौकों और कोर्ट द्वारा दिखाई गई काफी नरमी के बावजूद यादव शिकायत करने वाली कंपनी, मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए पेमेंट के वादे पूरे करने में नाकाम रहे है. कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट का मानना है कि राजपाल यादव का व्यवहार गलत है. बार-बार भरोसा देने और इस कोर्ट से मदद मांगने के बावजूद, समय-समय पर दिए गए आदेशों का पालन करने में नाकाम रहा है.

हालांकि राजपाल के वकील ने राहत की मांग करते हुए कहा था कि वो मुंबई के कुछ प्रोफेशनल काम में व्यस्त है. राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा ने 2010 में बतौर निदेशक पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए व्यापारी सुरेंदर सिंह से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था. इस रकम की वापसी के लिए यादव एक्सिस बैंक मुंबई का एक चेक सुरेंदर सिंह को दिया जोकि सितंबर 2015 में बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया.

राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ीं

बाद में कर्ज देने वाले व्यक्ति ने राजपाल की कंपनी श्री नौरंग गोदावरी इंटरटेनमेंट के खिलाफ केस दर्ज कराया था. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि मैं राजपाल यादव के अतीत के इस आचरण से संतुष्ट हूं कि वह इतनी राशि के भुगतान करने की स्थिति में होने के बावजूद सजा के क्रियान्वयन से बचने के लिए टाल मटोल कर रहे थे. बता दें कि निचली अदालत ने सात चेक बाउंस होने के मामले में छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी.

ये भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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