लीगल

पतंजलि के नए विज्ञापन के खिलाफ दायर डाबर की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से उसके उस नए टीवी विज्ञापन पर सवाल उठाया है, जिसमें उसने अपने अलावा बाकी सभी च्यवनप्राश उत्पादों को “धोखा” कहा है. इसे लेकर डाबर ने आपत्ति जताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का एक बार फिर रुख किया है. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया हैं.

अन्य के समान को फ्रॉड नहीं कह सकते

जस्टिस तेजस कारिया ने पतंजलि से सवाल किया कि आखिर आप कैसे दूसरी कंपनियों के उत्पाद को धोखा कह सकते है. कोर्ट ने पतंजलि से पूछा है कि आखिर आप कैसे सभी दूसरी कंपनियों की ओर से बनाए गए च्यवनप्राश को धोखा कह सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि पतंजलि की ओर से कहा जा रहा है कि उसका उत्पाद सर्वोत्तम हैं, लेकिन वह किसी अन्य के समान को फ्रॉड नहीं कह सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि गुणवत्ता की बात कहना सही है, लेकिन किसी को फ्रॉड कहना सही नहीं हैं. वही डाबर ने कहा है कि पतंजलि का विज्ञापन मानहानिकारक है. डाबर ने दावा किया है कि पतंजलि प्रतिस्पर्धा के नियमों को तोड़ रहा है. डाबर ने कहा है कि उसका उत्पाद 1949 से ही बाजार में है. इसकी काफी प्रतिष्ठा है.

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले भी पतंजलि को फटकार लगा चुका है. कोर्ट ने अपने फैसले में संशोधन करते हुए कहा था कि पतंजलि अपने विज्ञापन में कह सकता है कि साधारण च्यवनप्राश का इस्तेमाल क्यों करें. लेकिन कोर्ट ने पतंजलि को अपने विज्ञापन में 40 जड़ी बूटियों के इस्तेमाल की बात करने पर रोक लगा दिया था.

याचिका वापस या फिर जुर्माना

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बाबा रामदेव से कहा था कि याचिका वापस लीजिए या फिर जुर्माना भरने के लिए तैयार रहिए. मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा था कि आपने च्यवनप्राश बनाने वाले हर व्यक्ति को बदनाम किया है. यह कहकर की उन्हें निर्माण करना नहीं आता, यह एक सामान्य बदनामी का मामला है. अंतिम आदेश पूरी तरह से सही है.

कोर्ट ने कहा था कि हम इस अपील पर हस्तक्षेप क्यों करें, सिद्धांतों का पालन सही ढंग से किया गया है. अगर अपील को सही नहीं पाया गया तो जुर्माना लगेगा. कंपनी की ओर से पेश वकील ने दलील दी और कहा था कि अपने उत्पाद की विशिष्टता को उजागर करने के उसके अधिकार में कटौती नहीं कि जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें: वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, दिल्ली में 22 लाख बच्चे फेफड़े से प्रभावित हैं।

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

QS एशिया रैंकिंग में CCSU की बड़ी छलांग, 694वें स्थान पर पहुंचा विश्वविद्यालय

QS एशिया रैंकिंग में CCSU ने बड़ी छलांग लगाई है.पिछले साल सीसीएसयू 801–850 के रैंक…

3 hours ago

योगी की छाया में अपना वजूद तलाशते नितिन नवीन

गोरखपुर में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और CM योगी की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा निकली. सपा…

3 hours ago

अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का दम, जानें कौन जीता और कौन हारा?

US Midterm Elections 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के 57 उम्मीदवारों ने…

5 hours ago

दिल्ली SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट इस तारीख को करेगा सुनवाई, 33 लाख नोटिस और 47 लाख नाम काटने के आरोपों पर EC से तीखे सवाल

दिल्ली में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को सुनवाई करेगा. 33…

5 hours ago

‘देश को पीएम मोदी पर भरोसा, राहुल को नकारा’, गोरखपुर में बीजेपी अध्यक्ष का कांग्रेस पर बड़ा हमला

गोरखपुर में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा’ के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन…

6 hours ago