देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर किया गया है. दायर जनहित याचिका में दिल्ली में 22 लाख बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुचने की बात कही गई है. दायर जनहित याचिका में वायु प्रदूषण को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग की गई है. साथ ही देश भर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की है.
NCPA लगातार अपने लक्ष्यों से पीछे
यह याचिका ल्यूक क्रिस्टोफर काउंटीन्हों ने दायर की है. याचिकाकर्ता के मुताबिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए कम से कम 4000 स्टेशनों, शहरी क्षेत्रों में 2800 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1200 की आवश्यकता है, फिर भी NCPA लगातार अपने लक्ष्यों से पीछे रह गए हैं. जो निगरानी मौजूद है, वह शहर केंद्रित है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, अनौपचारिक बस्तियां और कमजोर समुदाय व्यवस्थित मूल्यांकन के दायरे से बाहर रह जाते हैं.
इसके परिणामस्वरूप गंभीर डेटा शैडों उत्पन्न होता है, जहां सबसे अधिक प्रभावित होने के बावजूद सबसे हासिए पर रहने वाली आबादी के जोखिम आधिकारिक नीति में अदृश्य रहते हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है.
नेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग
याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली में 22 लाख बच्चों के फेफड़े खराब है. याचिका में नेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि GRAP को लागू करने में अक्सर लापरवाही बरती जाती है. GRAP तब लागू किया जाता है, जब तक वायु गुणवत्ता गंभीर प्लस श्रेणी में नहीं पहुच जाती. धुंध स्प्रेयर, एंटी स्मॉग गन और कृत्रिम वर्षो जैसे अस्थायी उपाय प्रतीकात्मक आश्वासन दे सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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