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सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर सर्वोच्च न्यायालय रखने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने DMRC से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर सर्वोच्च न्यायालय रखने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट डीएमआरसी से जवाब मांगा है. कोर्ट 24 अप्रैल को सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस क्रिया की पीठ ने डीएमआरसी से जवाब मांगा है. मामले की सुनवाई के दौरान डीएमआरसी ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि नाम बदलने पर सरकारी खजाने पर 40 लाख रुपए का खर्च आएगा.

डीएमआरसी की ओर से पेश वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का नाम बदलकर सर्वोच्च न्यायालय करने से इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन का नाम भी भी विश्वविद्यालय है. साथ ही स्टेशनों का नाम बदलने में लगभग 40 से 50 लाख रुपए का सार्वजनिक धन खर्च हो सकता है. वकील ने आगे कहा कि मेट्रो स्टेशनों के नामकरण एक नीतिगत निर्णय है.

हालांकि हाई कोर्ट ने कहा कि कई मुकदमों की.आशंका को राजभाषा अधिनियम के जनादेश की अनदेखी करने का बचाव नहीं माना जा सकता है. हाई कोर्ट ने कहा कि हमे अधिनियम का सम्मान करना होगा. उमेश शर्मा नामक एक व्यक्ति ने मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलकर सर्वोच्च न्यायालय करने की मांग की है.

दिल्ली विश्व विद्यालय और सुप्रीम कोर्ट में फर्क क्यों?

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डीएमआरसी से पूछा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन का हिंदी में नाम विश्व विद्यालय है, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन का हिंदी में नाम केंद्रीय सचिवालय है, तो सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी में नाम सर्वोच्च न्यायालय क्यों नही हो सकता है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए डीएमआरसी के वकील से कहा था कि अपने अधिकारियों को बता दे कि यदि केंद्रीय सचिवालय का हिंदी में अनुवाद किया जा सकता है, तो दिल्ली विश्व विद्यालय का अनुवाद किया जा सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को सर्वोच्च न्यायालय के रूप में अंकित नहीं किया जा सकता है.

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने दिल्ली.मेट्रो को मेट्रो स्टेशन का नाम सुप्रीम कोर्ट रखने का सुझाव भेजा और वो मेट्रो प्रशासन के पैनल की ओर से स्वीकार कर लिया गया. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि हिंदी में अनुवाद करने में विभाग काफी आलसी है. वे गृह मंत्रालय जा सकते थे. एक राजभाषा विभाग भी है. अगर उन्हें कोई समस्या है तो वे इसका अनुवाद करा सकते थे, लेकिन वे हिंदी भाषा को खराब कर रहे है.

यह भी पढ़ें:  CAA पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई; 5 मई से शुरू होगी बहस, 237 याचिकाओं पर पीठ करेगी फैसला

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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