सीएए के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 मई से सुनवाई शुरू करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट को बताया कि दो साल से याचिका लंबित है. अभी तक उसपर सुनवाई नही हुई है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि 5 मई से 12 मई तक मामले में सुनवाई होगी. कोर्ट ने इसके लिए सभी पक्षों की ओर से दलील रखने के लिए समय सीमा को भी तय कर दिया है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि असम और त्रिपुरा को लेकर दायर याचिका पर अलग से सुनवाई होगी. इसको लेकर 237 याचिका दायर की गई है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सीएए कानून असंवैधानिक है और मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं.
IUML ने सीएए को असंवैधानिक बताया
आईयूएमएल ने दावा किया कि सीएए कानून के प्रावधान मनमाने हैं और सिर्फ धार्मिक पहचान के आधार पर एक वर्ग को अनुचित लाभ देते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन हैं. दायर याचिका में कहा गया है कि धर्म के आधार पर अप्रवासियों को नागरिकता देने का कानून धर्मनिरपेक्षता के मौलिक सिद्धांत का उल्लंघन है. नागरिकता संशोधन कानून के जरिए पहली बार देश में धर्म के आधार पर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अवैध अप्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.
नागरिकता और पासपोर्ट कानूनों में राहत की मांग
आईयूएमएल ने केंद्र सरकार को यह निर्देश भी देने की मांग कि याचिका पर निर्णय लंबित होने तक, किसी भी धर्म या संप्रदाय के सदस्यों को जिन्हें उनके धर्म के कारण बाहर रखा गया है, सीएए के दायरे में, नागरिकता अधिनियम 1955, पासपोर्ट अधिनियम, 1920, विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


