पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद गहराता नजर आ रहा है. जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) राज्य के एक पूर्व मंत्री के खाते से पूर्व मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत बैंक खाते में करीब 30 लाख रुपए ट्रांसफर किए जाने के संदिग्ध लेनदेन की गहन जांच में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक, इस वित्तीय लेनदेन को लेकर ED के अधिकारियों द्वारा संबंधित पूर्व मंत्री से पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन उनके द्वारा दिए गए जवाबों से एजेंसी संतुष्ट नहीं है.
मामले की शुरुआत तब हुई जब ED की टीमों ने पूर्व मंत्री से जुड़े कई नजदीकी सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की. लगभग 15 घंटे तक चली इस विस्तृत छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए. इन्हीं दस्तावेजों की प्राथमिक जांच के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत खाते में पूर्व मंत्री से जुड़े खाते द्वारा 30 लाख रुपए की राशि ट्रांसफर किए जाने का खुलासा हुआ.
अधिकारियों ने तुरंत इस जानकारी से अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया, जिसके बाद मामले के जांच के दायरे को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया. यद्यपि ED के अधिकारी आधिकारिक तौर पर इस लेनदेन की पुष्टि या खंडन करने से बच रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि एजेंसी पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी है.
पूछताछ के दौरान पूर्व मंत्री ने दावों की एक अलग कहानी पेश की है. सूत्रों के अनुसार, उन्होंने ED को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री के भीतर एक बेहतरीन गीतकार और कलाकार की अद्भुत प्रतिभा है. उन्होंने उस प्रतिभा का सम्मान करते हुए उनसे गीत लिखने का अनुरोध किया था.
पूर्व मंत्री का दावा है कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा गीत लिखे जाने के बाद उनकी एक संस्था के जरिए इस कार्य के पारिश्रमिक के रूप में करीब 30 लाख रुपए की राशि उनके व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी.
जब ED के अधिकारियों ने इस दावे की सत्यता परखने के लिए पूर्व मंत्री से उस गीत का ब्योरा, पांडुलिपि या संबंधित रिकॉर्ड मांगा, तो उन्होंने बताया कि वह गीत पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें व्हाट्सएप पर लिखकर भेजा था, लेकिन वह गलती से डिलीट हो चुका है.
आधिकारिक रिकॉर्ड या कोई लिखित प्रति न होने और ‘व्हाट्सएप से डिलीट’ होने के इस तर्क से ED अधिकारियों का शक और गहरा गया है. एजेंसी इस जवाब की विश्वसनीयता को सवालों के घेरे में मान रही है.
लेनदेन से जुड़ी इस दलील और अस्पष्टता को देखते हुए ED की टीम पहले पूर्व मंत्री को दोबारा पूछताछ के लिए तलब कर सकती है. यदि वित्तीय लेनदेन के वैध कारण स्पष्ट नहीं हो पाते हैं, तो आने वाले समय में पूर्व मुख्यमंत्री को भी पूछताछ के लिए समन जारी किया जा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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