Bharat Express DD Free Dish

वीर सावरकर टिप्पणी मामला: राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वीर सावरकर पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा और समन रद्द कर दिया है.

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से बड़ी और अंतिम कानूनी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए समन आदेश को भी निरस्त करने का निर्देश दिया है.

जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ का फैसला

सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया. अदालत ने अपने फैसले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जहाँ कानून के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व-मंजूरी अनिवार्य है और वह मंजूरी मौजूद नहीं है, वहाँ मामले की कानूनी कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता.

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने पीठ को आधिकारिक रूप से अवगत कराया कि राज्य सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में मुकदमा चलाने की कानूनी मंजूरी नहीं दी है. यूपी सरकार के इस रुख के बाद अदालत ने मुकदमा और समन दोनों रद्द करने का आदेश जारी किया.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 4 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. राहुल गांधी का रुख था कि उनके खिलाफ चल रही यह पूरी कानूनी कार्यवाही आधारहीन व दुर्भावनापूर्ण है और इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए.

पिछली सुनवाई में SC की सख्त टिप्पणी

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने राहुल गांधी के बयानों पर सख्त ऐतराज जताते हुए गंभीर मौखिक टिप्पणियां की थीं. राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि बयान का मकसद किसी भी वर्ग या समाज में वैमनस्य या दुश्मनी पैदा करना नहीं था. पीठ ने कहा था, “हमें यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है कि किसी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के खिलाफ इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया जाए. जब आप भारत के इतिहास और भूगोल के बारे में गहराई से नहीं जानते, तो स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते जिन्होंने देश को स्वतंत्रता दिलाई.”

महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी का संदर्भ

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने तल्ख लहजे में पूछा था कि क्या उनके मुवक्किल को यह ज्ञात है कि उस दौर में महात्मा गांधी ने भी पत्राचार में ‘आपका वफादार सेवक’ (Your Faithful Servant) जैसे शब्दों का उपयोग किया था? कोर्ट ने यह भी याद दिलाया था कि क्या उन्हें पता है कि उनकी दादी (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) ने भी सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए पत्र भेजा था.

ये भी पढ़ें: नौकरी देने से क्यों रोकें?’ करूर हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, बदला हाईकोर्ट का फैसला

अकोला प्रेस कॉन्फ्रेंस का विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद 17 नवंबर 2022 का है, जब महाराष्ट्र के अकोला जिले में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने वीर सावरकर पर विवादित टिप्पणी की थी. लखनऊ निवासी अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153(A) [समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना] और धारा 505 [सार्वजनिक शरारत/भड़काऊ बयान] के तहत शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि

राहुल गांधी ने 17 नवंबर 2022 (और संबंधित 17 दिसंबर 2022 के पत्राचार) को अकोला में सावरकर को अंग्रेजों का नौकर और पेंशन लेने वाला बताया था. प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को पहले से तैयार विवादित पर्चे बांटे गए थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि यह टिप्पणी सावरकर की छवि को धूमिल करने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी.

इससे पहले जून 2023 में मजिस्ट्रेट अदालत ने नृपेंद्र पांडे की शिकायत खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण (रिवीजन) याचिका को सत्र न्यायालय ने मंजूरी देकर समन जारी किया था. अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले से राहुल गांधी को इस आपराधिक मुकदमे से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read