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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कथित आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, दीपावली पर घर जाने की अनुमति

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कथित आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आशीष मिश्रा को दीपावली में घर जाने की अनुमति दे दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया जा चुका है. अभियोजन पक्ष के कुल 131 गवाहों में से 90 की गवाही दर्ज की जा चुकी है.

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण में मामले में हुई प्रगति पर संतोष जताया है. सुनवाई के दौरान दवे में स्पष्ट किया कि जज का तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया है. इसे जज के आचरण को लेकर उठे आरोपों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि ट्रायल जज से संबंधित रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति के समक्ष रखी गई है. अब नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनवाई करेंगे.

मामले में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी है. जिला जज शिव कुमार सिंह के जगह अब लोकेश राय मामले में सुनवाई करेंगे. इसके लिए राय को 14 अक्टूबर को नियुक्त किया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कपिल कटियार पक्ष रखेंगे. जबकि पहले प्रभाकर ब्रह्म मिश्रा राज्य सरकार का पक्ष रख रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवारों की ओर से निचली अदालत के जज के आचरण को लेकर उठाई गई चिंता की इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से जांच कर उचित कदम उठाने को कहा था. साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में नए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया था. इससे पहले कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे मामले की जांच करें और सुधारात्मक कदम उठाने के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपे.

प्रशांत भूषण ने अदालत में उठाए न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे

इससे पहले 22 सितंबर को शीर्ष अदालत ने पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने उन दलीलों का संज्ञान लिया था, जिनमें उन्होंने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए थे. उनका आरोप था कि न्यायाधीश ने कई आपराधिक मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया और आरोपियों को बरी कर दिया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मुकदमे की सुनवाई के तौर तरीकों और रफ्तार पर चिंता जताई थी और गवाहों की मौजूदगी पक्की करने के लिए निर्देश दिए थे.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि कुछ बहुत परेशान करने वाली घटनाएं हुई हैं, जो मानवीय जजों की अंतरात्मा को झकझोर देंगी कि कैसे यह जज, जो अभी इस मामले को देख रहे हैं, काम कर रहे हैं. जाहिर है, उन्होंने जो किया है कि वह काफी चौंकाने वाला है, न सिर्फ इस मामले में बल्कि कई दूसरे मामले में भी.

उन्होंने एनडीपीएस के मामले खुद अपने पास ले लिए और उनमें जमानत दे दी. भूषण ने कहा कि देखिए, वे क्या करते हैं, गवाह द्वारा बीमारी की पर्ची दिए जाने के बावजूद वे गैर जमानती वारंट जारी कर देते है.

यह भी पढ़ें: हैदराबाद और सिकंदराबाद समेत 7 ठिकानों पर ईडी की रेड, करोड़ों के हेरफेर का खुलासा

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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