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दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA की सप्लीमेंट्री चार्जशीट, अल कायदा से जुड़े डॉक्टर समेत 3 नए आरोपी

दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट मामले में एनआईए ने पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन और लोगो के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया है. दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट और मुजफर अहमद उर्फ फराज जफर को आरोपी बनाया है. इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी. जिन तीनों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया गया है, वे सभी जम्मू कश्मीर के रहने वाले है.

इसके साथ ही इस मामले में अब तक 13 लोगों के खिलाफ अब तक चार्जशीट दाखिल हो चुका है. इस हमले में फरार आरोपी मुजफर अहमद जो एक पीडियाट्रिशियन (MBBS, MD) हैं, की पहचान सह- आरोपी डॉक्टर अदिल अहमद राथर के बड़े भाई और अल कायदा से जुड़ी संस्था ” AGuH इंटरिम” के संस्थापक सदस्य के तौर पर हुई है. एनआईए की जांच से पता चला है कि मुजफर उन मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक थे, जिन्होंने सह-आरोपियों उमर, मुज्जमिल, अदील और मुफ़्ती इरफान के साथ मिलकर 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके की साजिश रची थी.

एनआईए जांच में यह भी पता चला है कि AGuH इंटरिम के संस्थापक सदस्यों में से एक, मुजफर ने जून 2022 में श्रीनगर में हुई ईदगाह की गुप्त बैठक में हिस्सा लिया था, जिसके दौरान आतंकी मॉड्यूल AGuH इंटरिम बनाया गया था. दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट में गिरफ्तार आरोपियों जमीर और तुफैल पर यूए (पी) एक्ट की धाराओं 13, 18, 20, 23, 38 और 39 और बीएनएस कि धारा 61 (2), 147, 148 और 152 के तहत आरोप लगाए गए हैं. जबकि मुजफर पर इसके अलावा बीएनएस की धारा 61 (2) के साथ धारा 103 (1), 109 (1),118 (1) और 118 (2), एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट की धाराओं 3, 4 और 5, और PDPP एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए है.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज

मुजफर, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उमर और मुजम्मिल द्वारा चलाई जा रही एक गुप्त आईडी फैसिलिटी में टीएटीपी आधारित आईडी बनाने, उनकी टेस्टिंग और उन्हें सुरक्षित रखने के काम मे गहराई से शामिल थे. मुजफर के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया गया है और उसे खोजने और गिरफ्तार करने की कोशिश जारी है. जमीर हैंडलर के लगातार संपर्क में था और टेरर मॉड्यूल के लिए हथियार, गोला बारूद और कैश पहुंचाने का काम करता था.

वही तुफैल प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए – तैयबा (LeT) का पूर्व OGW था, इस मॉड्यूल के लिए हथियार सप्लाई करता था. उसने एक हैंडलर के जरिए ‘डेड डॉप्स’ (गुप्त रूप से सामान छोड़ने की जगह) से एक AK-47, एक क्रींकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस हासिल किए थे और मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जो अब मर चुका है) को 3 लाख रुपए पहुचाएं थे. बता दें कि इस ब्लास्ट में 13 लोगो की मौत हो गई थी.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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